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खाड़ी देशों ने अभी तक ईरानी हमलों को सहा — लेकिन उनका ‘रक्षात्मक’ रुख ज्यादा समय तक नहीं टिकेगा

  खाड़ी देश अब तक ईरान के हमलों को बर्दाश्त कर रहे हैं — लेकिन उनका 'रक्षात्मक' रुख हमेशा के लिए नहीं रहेगा यह हेडलाइन CNBC के ताज़ा लेख (19 मार्च 2026) से ली गई है, जो US-इज़राइल-ईरान संघर्ष के बीच तेज़ी से बढ़ते तनाव को दिखाती है। मुख्य घटनाक्रम ईरान ने US और इज़राइल के हमलों (जैसे South Pars गैस फील्ड और अन्य ऊर्जा-सैन्य ठिकानों पर) के जवाब में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों — सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान — पर सैकड़ों (कुछ रिपोर्टों में UAE पर अकेले 2,000 से ज़्यादा) मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। निशाने: ऊर्जा सुविधाएँ (सऊदी अरब की Ras Tanura और Yanbu की SAMREF रिफाइनरी, कतर का Ras Laffan LNG कॉम्प्लेक्स — आग और नुकसान) एयरपोर्ट, बंदरगाह, होटल और नागरिक इलाके (दुबई, अबू धाबी, कुवैत एयरपोर्ट में दहशत, मलबे से हताहत) क्षेत्र में US बेस इन हमलों से तेल उत्पादन बाधित हुआ, आग लगी, नागरिक घायल/मारे गए और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा मंडराया (तेल की कीमतें अस्थिर, Hormuz जलडमरूमध्य पर खतरा)। खाड़ी देशों का अभी का रुख GCC देश अब तक पूरी तरह रक्षात्मक मुद्रा में हैं: अम...