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तेल की कीमतों में 2% से ज्यादा उछाल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ सुरक्षा योजना पर उठे सवाल

 


तेल की कीमतों में 2% से अधिक की तेजी, अमेरिका समर्थित होर्मुज जलडमरूमध्य सुरक्षा योजना पर संदेह बरकरार

न्यूयॉर्क/दुबई, 17 मार्च 2026: वैश्विक तेल बाजार में एक बार फिर उथल-पुथल मच गई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें सोमवार को 2% से अधिक बढ़कर प्रति बैरल 100 डॉलर के आसपास पहुंच गईं, जबकि WTI क्रूड भी इसी तरह की तेजी दिखा रहा है। यह उछाल मुख्य रूप से मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल ढुलाई पर गंभीर संकट के चलते आया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा संभालता है, जहां से सऊदी अरब, इराक, यूएई और अन्य देशों का कच्चा तेल निकलता है। ईरान के साथ चल रहे तनाव और अमेरिका-इजराइल के हमलों के जवाब में ईरान ने इस जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर प्रभावी रूप से रोक लगा दी है। ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि कोई भी जहाज बिना अनुमति के गुजरेगा तो उस पर हमला किया जाएगा, जिससे टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट को कम करने के लिए एक योजना पेश की है, जिसमें अमेरिकी नौसेना द्वारा तेल टैंकरों को एस्कॉर्ट (सुरक्षा प्रदान) करना और जहाजों के लिए 'रिस्क इंश्योरेंस' की व्यवस्था शामिल है। ट्रंप ने अन्य देशों से भी मदद मांगी है ताकि अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाकर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोला जा सके। ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि "जल्द ही एस्कॉर्ट शुरू हो सकता है, लेकिन अभी हम तैयार नहीं हैं।"

हालांकि, बाजार विशेषज्ञों और उद्योग के जानकारों में इस योजना पर गहरा संदेह है। कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी नौसेना के जहाजों को एस्कॉर्ट करने से वे खुद ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों के निशाने पर आ सकते हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो सकती है। जेपी मॉर्गन जैसी संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि अगर संकट लंबा खिंचा तो तेल की कीमतें 120-150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। साथ ही, बीमा कंपनियां इतने बड़े जोखिम को कवर करने से इनकार कर रही हैं, और सहयोगी देशों (जैसे जापान, ऑस्ट्रेलिया) ने अभी तक नौसैनिक मदद भेजने से इनकार किया है।

इस बीच, ईरान के पास से तेल निर्यात पहले से अधिक होने की खबरें हैं, जबकि रूस जैसे अन्य उत्पादक देश बिना होर्मुज के रास्ते फायदा उठा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, जलडमरूमध्य से तेल निर्यात अब "ट्रिकल" (बहुत कम) रह गया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति में बड़ी कमी आई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और इजाफा होगा, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर भारी असर डालेगा। बाजार अब ट्रंप प्रशासन की अगली चाल और ईरान के रुख पर नजरें टिकाए हुए है।

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