साइप्रस के राष्ट्रपति Nikos Christodoulides ने ब्रिटेन के सैन्य ठिकानों को ‘कॉलोनियल विरासत’ बताते हुए खुली चर्चा की मांग की है। जानिए Cyprus और United Kingdom के बीच बढ़ते तनाव और इसके पीछे की पूरी कहानी।
साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलिड्स ने ब्रिटिश सैन्य अड्डों के भविष्य पर ब्रिटिश सरकार के साथ खुली और स्पष्ट चर्चा की मांग की है। उन्होंने इन अड्डों को "उपनिवेशवादी अवशेष" (colonial remnant) या "उपनिवेशवाद की देन" करार दिया है।
यह बयान मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच आया है, खासकर 2 मार्च 2026 को RAF अक्रोटिरी (ब्रिटिश बेस) पर ड्रोन हमले के बाद। क्रिस्टोडुलिड्स ने ब्रसेल्स में 18-19 मार्च 2026 के आसपास कहा:
ब्रिटिश अड्डे साइप्रस के उपनिवेशवादी इतिहास का परिणाम हैं, जो 1960 में स्वतंत्रता के बाद भी बने रहे।
वर्तमान मध्य पूर्व संकट खत्म होने के बाद ब्रिटिश सरकार के साथ खुली चर्चा होगी।
इन क्षेत्रों में करीब 10,000 साइप्रियट नागरिक रहते हैं, जिनकी जिम्मेदारी साइप्रस की है।
मौजूदा ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग "1960 की स्वतंत्रता के बाद सबसे अच्छा" स्तर पर है।
मुख्य बिंदु:
ब्रिटेन ने 1960 के स्थापना संधि के तहत अक्रोटिरी और ढेकेलिया के दो मुख्य अड्डों (कुल 3% क्षेत्र) पर संप्रभुता बरकरार रखी, मुख्य रूप से सैन्य उद्देश्यों के लिए।
साइप्रस में स्थानीय विरोध प्रदर्शन बढ़े हैं, जहां लोग इन्हें सुरक्षा जोखिम मानते हैं (ईरान, इज़राइल या अमेरिकी ऑपरेशनों से जुड़ने का डर)। कुछ नारे हैं: "ब्रिटिश अड्डे यहां से बाहर"।
ब्रिटेन ने हाल में इन अड्डों पर अतिरिक्त हवाई रक्षा प्रणाली और विमान तैनात किए हैं।
यह मुद्दा पुराना है: कानूनी रूप से ब्रिटिश क्षेत्र हैं (ग्रीस और तुर्की से जुड़े समझौते), लेकिन कई साइप्रियट इसे पुरानी उपनिवेशवादी विरासत मानते हैं।
अभी कोई औपचारिक वार्ता शुरू नहीं हुई है, लेकिन क्रिस्टोडुलिड्स ने कहा कि चर्चा सार्वजनिक नहीं होगी। यह क्षेत्रीय तनाव (ईरान से जुड़ा) से जुड़ा है।

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