ईरान और वैश्विक शक्तियों के बीच गहराता तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य पर कूटनीतिक रस्साकशी और खाड़ी देशों का रुख
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ कूटनीति और युद्ध के बीच की रेखा धुंधली पड़ती जा रही है। ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों के 60 दिन पूरे होने के साथ ही, तेहरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर एक बड़ा दांव खेला है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को पूरी तरह खोलने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए उसने अमेरिका के सामने कड़ी शर्तें रखी हैं, जिन्हें नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल ठुकरा दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान का सबसे बड़ा कूटनीतिक हथियार
दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ईरान ने हाल ही में प्रस्ताव दिया है कि यदि अमेरिका उस पर लगी आर्थिक नाकेबंदी हटा लेता है और क्षेत्र में जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाता है, तो वह इस मार्ग पर लगे प्रतिबंधों को हटा सकता है। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिका को संदेश दिया है कि ब्लॉकेड खत्म होने की स्थिति में ही वैश्विक व्यापार के लिए यह मार्ग सुरक्षित रहेगा। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन और विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप इस प्रस्ताव से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि ईरान केवल समय हासिल करने की कोशिश कर रहा है और उसकी शर्तों में पारदर्शिता की कमी है।
खाड़ी देशों का रुख: किसके सुर सख्त और कौन है नरम?
ईरान के प्रति खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों का नजरिया कभी एक जैसा नहीं रहा है। इस क्षेत्र की भू-राजनीति को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि कौन सा देश ईरान को किस नजरिए से देखता है। BBC के विश्लेषण के अनुसार, खाड़ी देशों में ईरान के प्रति सबसे सख्त रवैया पारंपरिक रूप से सऊदी अरब और बहराइच का रहा है। सऊदी अरब ईरान को अपने क्षेत्रीय प्रभाव के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देखता आया है, हालांकि हाल के वर्षों में चीन की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में कुछ सुधार देखा गया है।
दूसरी ओर, ओमान और कतर को ईरान के प्रति सबसे 'नरम' देशों की श्रेणी में रखा जाता है। ओमान ने दशकों से ईरान और पश्चिम के बीच एक पुल या मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। कतर भी ईरान के साथ अपने गैस क्षेत्रों को साझा करता है, जिसके कारण वह तेहरान के साथ तनाव कम रखने की नीति पर चलता है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की स्थिति संतुलित रही है; जहाँ वह ईरान की विस्तारवादी नीतियों का विरोध करता है, वहीं वह अपने व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए ईरान के साथ आर्थिक संबंध भी बनाए रखना चाहता है।
रूस का समर्थन और अराग़ची की कूटनीति
ईरान पर बढ़ते सैन्य दबाव के बीच, तेहरान को मॉस्को से मिल रहा समर्थन उसके लिए संजीवनी साबित हो रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने हाल ही में रूस द्वारा दिए गए सामरिक और कूटनीतिक समर्थन की सराहना की है। द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अब यह मान चुका है कि पश्चिमी देशों के दबाव का मुकाबला करने के लिए उसे रूस और चीन जैसे देशों के साथ अपने गठबंधन को और अधिक मजबूत करना होगा। अराग़ची ने स्पष्ट किया कि ईरान अपनी संप्रभुता के साथ समझौता नहीं करेगा और इज़रायल की किसी भी आक्रामकता का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ट्रंप की वापसी और ईरान की चुनौतियां
डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिकी सत्ता में वापसी ने ईरान के लिए समीकरणों को और जटिल बना दिया है। ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में 'मैक्सिमम प्रेशर' (अधिकतम दबाव) की नीति अपनाई थी, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी। वर्तमान में ईरान द्वारा दी गई शर्तों को ट्रंप ने यह कहकर खारिज कर दिया है कि यह प्रस्ताव अमेरिका के हितों के अनुरूप नहीं है। ईरान चाहता है कि उसकी तेल बिक्री पर लगे प्रतिबंध पूरी तरह हटाए जाएं और उसे अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम (SWIFT) तक पहुंच मिले। लेकिन ट्रंप प्रशासन का झुकाव इज़रायल की सुरक्षा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने की ओर अधिक है।
निष्कर्ष: भविष्य की राह
ईरान और अमेरिका के बीच जारी यह गतिरोध केवल दो देशों का मामला नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक ईंधन कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ना तय है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट गहरा सकता है। खाड़ी देश भी इस समय दुविधा में हैं; वे नहीं चाहते कि उनके क्षेत्र में एक और विनाशकारी युद्ध हो, लेकिन वे ईरान के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर भी सशंकित हैं। World Press India के विश्लेषण के अनुसार, अगले कुछ हफ्ते इस क्षेत्र की दिशा और दशा तय करेंगे, जहाँ हर कदम फूंक-फूंक कर रखा जाना अनिवार्य है।
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