Gujarat Nikay Chunav Result 2026 LIVE Updates: गुजरात में फिर से भगवा परचम... सभी 15 निगमों में बीजेपी की जीत, सूरत में AAP का सूपड़ा साफ - AajTak
गुजरात निकाय चुनाव परिणाम 2026: सभी 15 नगर निगमों में बीजेपी का प्रचंड बहुमत, सूरत में 'आप' का सूपड़ा साफ
गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के निर्विवाद वर्चस्व को सिद्ध कर दिया है। साल 2026 के इन चुनावों में 'केसरिया लहर' इस कदर चली कि राज्य की सभी 15 नगर निगमों पर बीजेपी ने अपना कब्जा जमा लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य में पार्टी की इस ऐतिहासिक जीत ने विपक्ष के सभी दावों को ध्वस्त कर दिया है। अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे बड़े शहरों से लेकर छोटे निगमों तक, हर जगह बीजेपी कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है।
सूरत में पलटा पासा: आम आदमी पार्टी का सूपड़ा साफ
इस चुनाव के सबसे चौंकाने वाले परिणाम सूरत से सामने आए हैं। पिछले निकाय चुनावों में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) को इस बार करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। सूरत, जिसे 'आप' अपना नया गढ़ मान रही थी, वहां पार्टी का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी की सूक्ष्म प्रबंधन रणनीति और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता ने अरविंद केजरीवाल की पार्टी के पैर उखाड़ दिए हैं। सूरत की जनता ने एक बार फिर विकास के नाम पर 'कमल' पर भरोसा जताया है।
अहमदाबाद में बीजेपी की जीत के बाद स्थिति काफी उत्साहजनक दिखी, हालांकि यहां पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच मामूली नोकझोंक की खबरें भी सामने आईं, जो विजय जुलूस के दौरान भीड़ नियंत्रण को लेकर हुई थीं। पार्टी ने अहमदाबाद की लगभग सभी महत्वपूर्ण सीटों पर भारी अंतर से जीत दर्ज की है।
दिग्गजों की हार और नए चेहरों का उदय
इन चुनावों में केवल पार्टियों के बीच ही नहीं, बल्कि कई बड़े चेहरों की साख भी दांव पर लगी थी। जामनगर और उसके आसपास के क्षेत्रों में क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा जडेजा ने अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया है। रिवाबा, जो पहले ही विधायक के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं, उनके नेतृत्व में पार्टी ने स्थानीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया। वहीं दूसरी ओर, उनकी ननद नयनाबा जडेजा के लिए परिणाम निराशाजनक रहे, जिससे परिवार के भीतर की राजनीतिक जंग में रिवाबा का पलड़ा भारी नजर आया।
इस चुनाव में कुछ चौंकाने वाली हार भी देखने को मिलीं। एक पूर्व IPS अधिकारी, जिन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर राजनीति के मैदान में कदम रखा था, उन्हें जनता ने नकार दिया। इसके साथ ही, कई पूर्व विधायकों को भी पंचायत और निकाय स्तर पर शिकस्त झेलनी पड़ी है, जो यह संकेत देता है कि मतदाता अब केवल नाम नहीं बल्कि काम और स्थानीय उपलब्धता को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सपा और एआईएमआईएम की एंट्री: समीकरणों में बदलाव
भले ही पूरे राज्य में बीजेपी का दबदबा रहा हो, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अन्य दलों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर भविष्य के संकेत दिए हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (SP) ने गुजरात के कुछ वार्डों में अपनी 'साइकिल' दौड़ाई है, जो पार्टी के लिए एक नई शुरुआत मानी जा रही है। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने भी कुछ मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में अपनी 'पतंग' उड़ाकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। इन छोटे दलों की मौजूदगी ने कुछ सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया था, हालांकि यह बीजेपी के विजय रथ को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं था।
विकास की जीत और विपक्ष के लिए आत्ममंथन
गुजरात बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व ने इस जीत को 'विकासवाद' की जीत बताया है। मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने साझा बयान में कहा कि जनता ने प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और राज्य सरकार के सुशासन पर अपनी मुहर लगाई है। दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए ये नतीजे एक और बड़ा झटका हैं। राज्य में मुख्य विपक्षी दल होने के बावजूद कांग्रेस कई जगहों पर तीसरे स्थान पर खिसक गई है।
निष्कर्ष: 2026 के इन निकाय चुनावों ने स्पष्ट कर दिया है कि गुजरात में फिलहाल बीजेपी के किले को भेदना किसी भी दल के लिए आसान नहीं है। जहां बीजेपी अपनी इस जीत को 2027 के विधानसभा चुनावों के सेमीफाइनल के रूप में देख रही है, वहीं विपक्ष के लिए यह समय आत्ममंथन और अपनी खोई हुई जमीन तलाशने का है। सूरत में 'आप' की हार और निर्दलीय व छोटे दलों का उभरना गुजरात की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत की ओर इशारा कर रहा है।
Comments
Post a Comment