तमिलनाडु में 'थलपति' विजय का सियासी शंखनाद: सरकार बनाने का दावा पेश, क्या सुलझ गया नंबरगेम?
तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की आहट सुनाई दे रही है। सिनेमाई पर्दे पर राज करने वाले थलपति विजय अब राजनीति के मैदान में भी निर्णायक भूमिका में नजर आ रहे हैं। राज्य के जटिल राजनीतिक समीकरणों के बीच विजय की पार्टी, 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK), सत्ता की दहलीज पर खड़ी दिखाई दे रही है। हालिया घटनाक्रमों ने न केवल राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि दशकों से स्थापित द्रविड़ दलों के प्रभुत्व को भी चुनौती दी है। विजय की हालिया गतिविधियों और गठबंधन के नए फॉर्मूले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तमिलनाडु का 'नंबरगेम' अब एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है।
राजभवन में थलपति की 'हैट्रिक': सरकार बनाने का औपचारिक दावा
तमिलनाडु में जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच थलपति विजय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्यपाल से तीसरी बार मुलाकात की है। इस मुलाकात को महज एक औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि सत्ता की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, विजय ने राज्यपाल के समक्ष अपनी पार्टी और सहयोगी दलों के समर्थन का पत्र प्रस्तुत करते हुए सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। बार-बार राजभवन का रुख करना इस बात का संकेत है कि विजय अपनी रणनीतियों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं और वे जल्द से जल्द राज्य की कमान संभालने के लिए तैयार हैं।
गठबंधन का गणित: कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ से मिला 'जादुई आंकड़ा'
तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत साबित करना किसी भी दल के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन विजय ने इस 'नंबरगेम' को सुलझाने का रास्ता निकाल लिया है। खबरों के अनुसार, कांग्रेस के समर्थन के बाद अब तीन अन्य महत्वपूर्ण दलों ने भी टीवीके (TVK) को अपना समर्थन देने का मन बना लिया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण संकेत वामपंथी दलों की ओर से आए हैं, जिन्होंने विजय के साथ खड़े होने की मंशा जाहिर की है। यदि यह गठबंधन धरातल पर उतरता है, तो विजय के पास बहुमत के लिए आवश्यक 'जादुई आंकड़ा' आसानी से उपलब्ध होगा, जिससे उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट जाने की अफवाह और TVK की सफाई
राजनीतिक उठापटक के बीच बीते दिनों यह अफवाह तेजी से फैली थी कि विजय और उनकी पार्टी राज्यपाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली है। मीडिया के एक वर्ग में दावा किया गया था कि राज्यपाल द्वारा सरकार गठन में देरी किए जाने के कारण टीवीके कानूनी सहारा ले सकती है। हालांकि, पार्टी ने इन दावों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया है कि वे वर्तमान में संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं और फिलहाल ऐसी कोई अर्जी दाखिल नहीं की गई है। टीवीके नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं से धैर्य रखने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर विश्वास करने की अपील की है।
निष्कर्ष: तमिलनाडु की राजनीति में नई संभावनाओं का उदय
तमिलनाडु के इस सियासी संग्राम में फिलहाल पलड़ा थलपति विजय का भारी नजर आ रहा है। 8 प्रमुख दलों के इस खेल में विजय ने जिस तरह से कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा वाले दलों को अपने साथ जोड़ा है, वह उनकी परिपक्व राजनीति का परिचायक है। यदि राज्यपाल उनके दावे को स्वीकार करते हैं, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा। हालांकि, विरोधी खेमा भी शांत नहीं बैठेगा और आने वाले दिनों में दांव-पेच का यह खेल और भी आक्रामक हो सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें राजभवन के अगले कदम पर टिकी हैं।
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