तमिलनाडु में थलपति विजय का 'पॉवर प्ले': नंबरगेम की बिसात पर उलझी दक्षिण की राजनीति
तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों भारी हलचल मची हुई है। अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय और उनकी पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से गरमा दिया है। एक तरफ जहां विजय ने सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए कमर कस ली है, वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु के 8 अन्य राजनीतिक दलों ने इस खेल को और अधिक उलझा दिया है। हालिया घटनाक्रमों ने यह साफ कर दिया है कि सिनेमा के पर्दे पर विरोधियों को पछाड़ने वाले विजय के लिए राजनीति का यह 'नंबरगेम' किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। फिलहाल राज्य की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि थलपति अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत बहुमत के साथ कर पाएंगे या विपक्षी दलों की रणनीतियां उनके सपनों पर ग्रहण लगा देंगी।
राज्यपाल से मुलाकात और सरकार बनाने का दावा
दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार विजय ने अपनी राजनीतिक सक्रियता को अगले स्तर पर ले जाते हुए हाल ही में राज्यपाल से तीसरी बार मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने तमिलनाडु में सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया। हालांकि, विजय की यह राह उतनी आसान नहीं दिख रही जितनी कि कल्पना की गई थी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विजय के पास वर्तमान में बहुमत साबित करने के लिए जरूरी विधायकों का समर्थन पर्याप्त नहीं है। राज्यपाल से बार-बार की जा रही ये मुलाकातें इस बात का संकेत हैं कि टीवीके (TVK) अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पर्दे के पीछे लगातार जोड़-तोड़ की कोशिशों में जुटी हुई है।
गठबंधन के पेच: VCK की शर्तें और IUML का रुख
विजय के सत्ता की शपथ लेने के मंसूबों पर फिलहाल सहयोगी और विपक्षी दलों की ओर से रुकावटें आती दिख रही हैं। VCK (विदुथलाई चिरुथैगल कात्ची) ने समर्थन के लिए कड़ी शर्तें रख दी हैं, जिसने विजय की शपथ ग्रहण प्रक्रिया पर 'ग्रहण' लगा दिया है। वहीं, मुस्लिम मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ रखने वाली पार्टी IUML (इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग) ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वे थलपति विजय की पार्टी TVK के साथ नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन (DMK) के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं। इन दो प्रमुख दलों के रुख ने विजय के लिए गठबंधन की राह को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
AIADMK और बीजेपी के बीच बढ़ी दूरियां
तमिलनाडु के इस बड़े सियासी ड्रामे के बीच एक और महत्वपूर्ण मोड़ आया है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी AIADMK ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) से अपने सभी रिश्ते तोड़ दिए हैं। पार्टी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह अब एनडीए (NDA) का हिस्सा नहीं रहेगी। AIADMK का यह फैसला राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने वाला साबित हो सकता है। बीजेपी से अलग होकर AIADMK अब अपनी नई रणनीति पर काम कर रही है, जिसका सीधा असर विजय की पार्टी के संभावित समीकरणों पर भी पड़ सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या AIADMK और TVK के बीच कोई भविष्य की संभावनाएं बनती हैं या यह प्रतिद्वंद्विता और बढ़ेगी।
निष्कर्ष: क्या पार हो पाएगा बहुमत का जादुई आंकड़ा?
तमिलनाडु की राजनीति अब पूरी तरह से 'नंबरगेम' में उलझ गई है। थलपति विजय की लोकप्रियता भले ही चरम पर हो, लेकिन लोकतांत्रिक राजनीति में संख्या बल ही सबसे ऊपर होता है। फिलहाल जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उसके अनुसार विजय बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं जुटा पाए हैं। 8 प्रमुख दलों की अपनी-अपनी महत्वाकांक्षाएं और विचारधाराएं विजय के लिए बड़ी बाधा बन रही हैं। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि क्या थलपति कोई बड़ा उलटफेर कर पाएंगे या तमिलनाडु के पुराने राजनीतिक खिलाड़ी उनका गेम बिगाड़ने में सफल रहेंगे। आने वाले कुछ दिन तमिलनाडु की सत्ता का भविष्य तय करने के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।
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