तमिलनाडु की राजनीति में नया सवेरा: विजय की टीवीके को वामदलों का साथ, क्या कल शपथ के साथ खत्म होगा सियासी सस्पेंस?
दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज सुपरस्टार विजय, जो अब अपनी पार्टी 'तमिलनाडु वेत्री कड़गम' (TVK) के जरिए राजनीतिक मैदान में उतरे हैं, मुख्यमंत्री बनने की दहलीज पर खड़े हैं। पिछले कुछ दिनों से तमिलनाडु की सियासत में जारी अनिश्चितता और भारी जोड़-तोड़ के बाद अब तस्वीर साफ होती दिखाई दे रही है। ताजा घटनाक्रमों के अनुसार, राज्यपाल आर.एन. रवि ने विजय को सरकार बनाने का न्योता दे दिया है। यह खबर न केवल उनके समर्थकों के लिए उत्सव का विषय है, बल्कि राज्य की पारंपरिक द्रविड़ राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत भी है।
वामपंथी दलों का समर्थन और बहुमत का गणित
विजय की पार्टी टीवीके के लिए सत्ता का रास्ता इतना आसान नहीं था। शुरुआती आंकड़ों में पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े से थोड़ी दूर नजर आ रही थी। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब सीपीआई (CPI) और सीपीएम (CPM) जैसे वामपंथी दलों ने टीवीके को समर्थन देने का संकेत दिया। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बहुमत से कुछ कदम दूर होने के बावजूद इन दलों के साथ ने विजय की स्थिति को मजबूत किया है। हालांकि अभी भी गठबंधन के भीतर की शर्तें पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन वामदलों का साथ मिलना विजय के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।
राजभवन की सक्रियता और शपथ ग्रहण की तैयारी
तमिलनाडु के राजनीतिक घटनाक्रम में 'आज तक' और 'हिंदुस्तान' की रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि सुपरस्टार विजय कल सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया और आवश्यक विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा। राज्यपाल द्वारा सरकार बनाने का आधिकारिक न्योता मिलने के बाद चेन्नई में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं। यह विजय के प्रशंसकों के लिए एक ऐतिहासिक पल होगा, क्योंकि एमजीआर और जयललिता के बाद एक बार फिर सिनेमाई पर्दे का बड़ा नायक सत्ता के शीर्ष पर बैठने जा रहा है।
राजनीतिक गतिरोध और राष्ट्रपति शासन की अटकलें
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान तमिलनाडु में गहरे राजनीतिक गतिरोध की स्थिति भी बनी रही। 'द वायर' और 'जनसत्ता' के अनुसार, विजय को राज्यपाल से तीन बार मिलना पड़ा, जिससे यह संकेत मिले कि बहुमत साबित करना एक कठिन चुनौती थी। एक समय पर ऐसी स्थिति बन गई थी कि यदि टीवीके बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा पाती, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की नौबत आ सकती थी। विपक्षी दलों ने भी इस गतिरोध को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन अंततः बहुमत का आंकड़ा जुटा लेने के दावे ने इन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है।
निष्कर्ष
तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से ही करिश्माई व्यक्तित्वों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। विजय का मुख्यमंत्री के रूप में उदय यह दर्शाता है कि राज्य की जनता अभी भी सिनेमाई नायकों में अपना राजनीतिक भविष्य तलाश रही है। हालांकि, वामपंथी दलों के समर्थन से चलने वाली यह सरकार कितनी स्थिर होगी और क्या विजय चुनावी वादों को धरातल पर उतार पाएंगे, यह एक बड़ा सवाल है। फिलहाल, सभी की निगाहें कल होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं, जो राज्य में एक नए राजनीतिक अध्याय की आधिकारिक शुरुआत करेगा।
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