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दिनाकरन ने लेटर फर्जी बता FIR कराई, TVK ने जारी किया AMMK विधायक का वीडियो... तमिलनाडु में चढ़ा सियासी पारा - AajTak

तमिलनाडु में सियासी घमासान: थलपति विजय का 'शक्ति प्रदर्शन', फर्जी लेटर और वीडियो वॉर से गरमाया माहौल

तमिलनाडु की राजनीति इस समय अपने सबसे रोमांचक और अनिश्चित दौर से गुजर रही है। दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार से राजनेता बने थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के सत्ता की दहलीज पर पहुंचने की कोशिशों ने राज्य के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। एक तरफ विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर तीसरी बार सरकार बनाने का दावा पेश किया है, तो दूसरी तरफ विपक्षी दलों के बीच 'लेटर वॉर' और 'वीडियो वॉर' शुरू हो गया है। जोड़-तोड़ की इस राजनीति में आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर तेज है, जिससे यह सवाल गहरा गया है कि क्या विजय वाकई तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे या अभी इस कहानी में और भी मोड़ आने बाकी हैं।

राज्यपाल से तीसरी मुलाकात और सरकार बनाने का दावा

तमिलनाडु की राजनीति में 'थलपति' के नाम से मशहूर विजय ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। हालिया घटनाक्रम के अनुसार, विजय ने राजभवन जाकर राज्यपाल आर.एन. रवि से तीसरी बार मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने बहुमत होने का दावा पेश करते हुए सरकार बनाने की इच्छा जताई है। टीवीके (TVK) समर्थकों में इस बात को लेकर भारी उत्साह है कि विजय जल्द ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। हालांकि, राजभवन की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर शपथ ग्रहण की तारीख या आमंत्रण को लेकर कोई स्पष्ट बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे सस्पेंस बरकरार है।

फर्जी लेटर का आरोप और AMMK विधायक का वायरल वीडियो

सरकार बनाने की इस जद्दोजहद के बीच एएमएमके (AMMK) प्रमुख टीटीटी दिनाकरन ने एक गंभीर आरोप लगाकर खलबली मचा दी है। दिनाकरन का दावा है कि उनकी पार्टी के विधायक का समर्थन पत्र, जिसे टीवीके द्वारा पेश किया जा रहा है, वह पूरी तरह से फर्जी है। इस मामले में दिनाकरन ने पुलिस में FIR भी दर्ज कराई है। पलटवार करते हुए, थलपति विजय की पार्टी टीवीके ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें कथित तौर पर एएमएमके विधायक विजय को अपना समर्थन देते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस 'वीडियो बनाम लेटर' की जंग ने तमिलनाडु की राजनीति में कानूनी और नैतिक सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसने शक्ति परीक्षण को और पेचीदा बना दिया है।

लेफ्ट पार्टियों का समर्थन और बीजेपी को लेकर सख्त चेतावनी

तमिलनाडु के इस सत्ता संघर्ष में वामपंथी दलों (Left Parties) की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। लेफ्ट पार्टियों ने सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) का साथ छोड़कर विजय के प्रति झुकाव दिखाया है, लेकिन यह समर्थन बिना किसी शर्त के नहीं है। वामपंथी नेताओं ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि थलपति विजय भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ किसी भी तरह का गठबंधन करते हैं या उनके करीब जाते हैं, तो वे अपना समर्थन तुरंत वापस ले लेंगे। लेफ्ट पार्टियों का कहना है कि उन्होंने डीएमके को इसलिए छोड़ा क्योंकि वहां उनकी विचारधारा और अपेक्षाओं का सम्मान नहीं हो रहा था, लेकिन वे सांप्रदायिक राजनीति के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे।

शपथ ग्रहण पर सस्पेंस और आगे की राह

वर्तमान में तमिलनाडु की विधानसभा में संख्या बल का खेल काफी उलझा हुआ नजर आ रहा है। एक ओर थलपति विजय के शपथ ग्रहण समारोह की लाइव अपडेट्स का इंतजार उनके प्रशंसक बेसब्री से कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष उनकी बहुमत की वैधता पर सवाल उठा रहा है। क्या विजय वाकई जादुई आंकड़ा पार कर पाएंगे या यह राजनीतिक संकट राज्य में राष्ट्रपति शासन या नए समीकरणों की ओर ले जाएगा? अगले 24 से 48 घंटे तमिलनाडु की भविष्य की दिशा तय करने वाले साबित होंगे।

निष्कर्ष: तमिलनाडु की राजनीति अब केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह दांव-पेंच और डिजिटल साक्ष्यों की लड़ाई बन चुकी है। थलपति विजय के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर कांटों भरा दिख रहा है, जहां उन्हें एक तरफ अपनी पार्टी के अंदरूनी समर्थन को साबित करना है, वहीं दूसरी ओर सहयोगियों की सख्त शर्तों और विरोधियों के कानूनी हमलों का सामना करना है। फिलहाल, पूरी नजरें राजभवन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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