ईरान के विदेश मंत्री 24 घंटे के अंदर दोबारा इस्लामाबाद पहुंचे, ट्रंप ने कहा- युद्ध जल्द ख़त्म होगा - BBC
मध्य पूर्व में गहराता संकट: ईरानी विदेश मंत्री की इस्लामाबाद में आपात दस्तक और डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा अल्टीमेटम
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कूटनीतिक सरगर्मियों के बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की हालिया गतिविधियों ने वैश्विक समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पिछले 24 घंटों के भीतर अराघची का दो बार पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि क्षेत्र में स्थितियां अत्यंत संवेदनशील मोड़ पर हैं। एक ओर जहां ईरान अपने पड़ोसी देशों और क्षेत्रीय शक्तियों के साथ विचार-विमर्श कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े बयानों ने इस पूरे घटनाक्रम को एक नया आयाम दे दिया है।
इस्लामाबाद में कूटनीतिक गहमागहमी: अराघची और असीम मुनीर की मुलाकात
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का ओमान की यात्रा के तुरंत बाद पुनः इस्लामाबाद लौटना सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपनी इस संक्षिप्त लेकिन सघन यात्रा के दौरान उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और अन्य उच्चाधिकारियों से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, इस वार्ता का मुख्य केंद्र बिंदु क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और मध्य पूर्व में इजरायल के साथ बढ़ते संघर्ष की संभावनाएं थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस समय अंतरराष्ट्रीय दबाव और संभावित सैन्य कार्रवाई के बीच एक 'बफर जोन' या मध्यस्थ की तलाश में है। पाकिस्तान, जिसके संबंध अमेरिका और ईरान दोनों के साथ जटिल रहे हैं, इस समय एक महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आ रहा है। अराघची की इस सक्रियता को ईरान की उस रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें वह किसी भी बड़े टकराव से पहले क्षेत्रीय सहयोगियों को विश्वास में लेना चाहता है।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख: 'बात करनी है तो कॉल करें'
इस कूटनीतिक हलचल के बीच अमेरिका से आ रहे बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने एक संबोधन में दावा किया है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध बहुत जल्द समाप्त होगा और इसमें जीत उनकी (अमेरिका और उसके सहयोगियों की) होगी। ट्रंप ने सीधे तौर पर ईरान को संबोधित करते हुए कहा कि "सभी कार्ड हमारे पास हैं" और यदि ईरान वास्तव में शांति चाहता है या बातचीत करना चाहता है, तो उसे सीधे संपर्क करना चाहिए।
ट्रंप का यह बयान केवल एक प्रस्ताव नहीं बल्कि एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान के पास बातचीत की मेज पर आने के लिए बहुत कम समय बचा है। ट्रंप के इस रुख ने ईरान के भीतर और बाहर कूटनीतिक गलियारों में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि उनका पिछला कार्यकाल ईरान पर 'अधिकतम दबाव' (Maximum Pressure) की नीति के लिए जाना जाता था।
तीन दिन का अल्टीमेटम और तेल पाइपलाइनों पर खतरा
विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और मीडिया आउटलेट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन की ओर से ईरान को एक अनौपचारिक लेकिन गंभीर अल्टीमेटम दिया गया है। खबरों की मानें तो ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि ईरान अगले तीन दिनों के भीतर सार्थक बातचीत के लिए आगे नहीं आता है, तो उसकी तेल पाइपलाइनों और आर्थिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। यह चेतावनी ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर सीधा प्रहार करने जैसी है।
ईरान पहले से ही कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, और यदि उसकी तेल निर्यात क्षमता पर कोई हमला होता है, तो देश के भीतर गंभीर आर्थिक अस्थिरता पैदा हो सकती है। यही कारण है कि अराघची का बार-बार इस्लामाबाद और मस्कट (ओमान) का दौरा करना उनकी हताशा और कूटनीतिक बचाव की कोशिशों को दर्शाता है।
भविष्य की राह: शांति या विनाशकारी संघर्ष?
विश्व प्रेस इंडिया के विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान स्थिति किसी भी दिशा में मुड़ सकती है। ईरान के पास दो ही विकल्प शेष नजर आते हैं: पहला, ट्रंप की शर्तों पर बातचीत शुरू करना, जो तेहरान के लिए राजनीतिक रूप से कठिन हो सकता है; और दूसरा, संघर्ष के मार्ग पर आगे बढ़ना, जिसके परिणाम पूरे विश्व के लिए विनाशकारी हो सकते हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने फिलहाल इन धमकियों पर आधिकारिक रूप से कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अराघची की इस्लामाबाद में जनरल मुनीर के साथ लंबी बैठकें यह दर्शाती हैं कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ा पक रहा है। क्या पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा? क्या ट्रंप अपनी धमकियों को हकीकत में बदलेंगे? ये ऐसे सवाल हैं जिनका उत्तर आने वाले 72 घंटों में मिलने की संभावना है।
निष्कर्ष: मध्य पूर्व इस समय बारूद के ढेर पर बैठा है। ईरान की कूटनीतिक भागदौड़ और ट्रंप का आक्रामक रवैया यह स्पष्ट करता है कि वैश्विक राजनीति का केंद्र एक बार फिर तेहरान और वाशिंगटन के बीच का तनाव बन गया है। दुनिया की नजरें अब ईरान के अगले कदम और ट्रंप की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।
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