West Bengal Phase 1 & Tamil Nadu Election 2026 Voting LIVE: लोकतंत्र का 'सुपर गुरुवार'... बंगाल में 91.35% वोटिंग और तमिलनाडु में 84.29% मतदान दर्ज - AajTak
लोकतंत्र का 'सुपर गुरुवार': बंगाल में 91.35% और तमिलनाडु में 84.29% रिकॉर्ड मतदान, हिंसा और उत्साह के बीच थमा पहले चरण का शोर
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आज का दिन एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण और तमिलनाडु की सभी सीटों पर हुए मतदान ने जनभागीदारी के पिछले कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। भीषण गर्मी और राजनीतिक गहमागहमी के बावजूद मतदाताओं ने जिस तरह से पोलिंग बूथों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, उसे निर्वाचन आयोग ने लोकतंत्र की एक सशक्त तस्वीर बताया है। इस 'सुपर गुरुवार' को पश्चिम बंगाल में जहाँ 91.35% मतदान हुआ, वहीं तमिलनाडु में 84.29% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर भविष्य की नई इबारत लिख दी है।
रिकॉर्डतोड़ मतदान: बंगाल और तमिलनाडु में वोटिंग का सैलाब
चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, शाम ढलते-ढलते मतदान का प्रतिशत उम्मीद से कहीं अधिक रहा। पश्चिम बंगाल के पहले चरण में मतदान का स्तर 91.35% तक पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि राज्य की जनता अपनी सरकार चुनने के लिए कितनी सजग है। दोपहर 3 बजे तक बंगाल में 78.77% और तमिलनाडु में 70% मतदान दर्ज किया गया था, लेकिन अंतिम घंटों में बूथों पर भारी भीड़ उमड़ी। तमिलनाडु में भी 84.29% की भारी वोटिंग ने राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया है। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच लाखों युवा, बुजुर्ग और महिला मतदाताओं ने लंबी कतारों में लगकर लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लिया।
ममता बनर्जी का बयान और विशेषज्ञों का विश्लेषण
इतनी भारी संख्या में मतदाताओं के बाहर निकलने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, "बंगाल के लोग जानते हैं कि उनके लिए क्या सही है। यह भारी मतदान इस बात का प्रमाण है कि जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और राज्य की अस्मिता को लेकर जागरूक है।" राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी मतदान का प्रतिशत इतना अधिक होता है, तो यह मौजूदा सरकार के पक्ष में 'प्रो-इंकम्बेंसी' या बदलाव के लिए 'एंटी-इंकम्बेंसी' की एक बड़ी लहर का संकेत हो सकता है। बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला है और यह रिकॉर्ड वोटिंग किसी भी तरफ पलड़ा झुका सकती है।
हिंसा की छिटपुट घटनाएं: कुमारग्राम में बीजेपी उम्मीदवार पर हमला
जहाँ एक ओर मतदान का प्रतिशत खुश करने वाला रहा, वहीं बंगाल के कुछ हिस्सों से चुनावी हिंसा की खबरें भी सामने आईं। अलीपुरद्वार जिले के कुमारग्राम में तनाव की स्थिति देखी गई, जहाँ बीजेपी उम्मीदवार सुवेंदु सरकार पर हमला हुआ। आरोप है कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेरकर पीटा और दौड़ाया। इस घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। राज्य के अन्य हिस्सों से भी छिटपुट झड़पों और ईवीएम में खराबी की शिकायतें मिलीं, लेकिन प्रशासन की मुस्तैदी के कारण मतदान की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रही। बीजेपी ने इन घटनाओं को लेकर चुनाव आयोग से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
निष्कर्ष: भविष्य की ओर संकेत
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के इन चुनावों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता खामोश नहीं है। 91% से अधिक का मतदान केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए एक कड़ा संदेश है। सुरक्षा के कड़े घेरे और केंद्रीय बलों की मौजूदगी में संपन्न हुआ यह 'सुपर गुरुवार' अब परिणामों के इंतजार में है। क्या बंगाल में सत्ता विरोधी लहर काम कर रही है या ममता बनर्जी का जादू बरकरार है? और तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति किस ओर करवट लेगी? इन सभी सवालों के जवाब मतगणना वाले दिन ही मिलेंगे, लेकिन आज जनता ने भारी संख्या में वोट देकर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है।
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