तमिलनाडु में 'थलपति' विजय का राजतिलक: राज्यपाल से मिले टीवीके प्रमुख, कल मुख्यमंत्री पद की लेंगे शपथ
तमिलनाडु की राजनीति में आज एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। राज्य की सत्ता पर काबिज होने की दिशा में तमिल सुपरस्टार और 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के प्रमुख थलपति विजय ने अपनी दावेदारी अत्यंत मजबूती के साथ पेश कर दी है। पिछले कई महीनों से चल रही राजनीतिक अटकलों पर विराम लगाते हुए विजय ने आज राज्यपाल से मुलाकात की और स्पष्ट किया कि उनके पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत मौजूद है। इस घटनाक्रम ने न केवल दक्षिण भारत, बल्कि पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
राजभवन में विजय का शक्ति प्रदर्शन: सरकार बनाने का दावा पेश
आज चेन्नई स्थित राजभवन में गहमागहमी का माहौल रहा जब टीवीके प्रमुख थलपति विजय ने राज्यपाल आर.एन. रवि से औपचारिक मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान विजय ने अपने समर्थक विधायकों की सूची और समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपे। सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने दस्तावेजों की समीक्षा के बाद विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर दिया है। टीवीके के पास स्पष्ट बहुमत होने की पुष्टि के बाद अब राज्य में 'विजय सरकार' के गठन का रास्ता साफ हो गया है। यह विजय के प्रशंसकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है, जो लंबे समय से अपने 'थलपति' को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देखने का सपना संजोए हुए थे।
कल होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोह, 13 मई को शक्ति परीक्षण
राज्यपाल से हरी झंडी मिलने के बाद अब सबकी निगाहें कल होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं। जानकारी के मुताबिक, थलपति विजय कल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। प्रशासन ने चेन्नई में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और समारोह को भव्य बनाने की तैयारियां जारी हैं। हालांकि, शपथ ग्रहण के बाद असली परीक्षा विधानसभा के पटल पर होगी। आगामी 13 मई को फ्लोर टेस्ट निर्धारित किया गया है, जहां विजय को अपनी सरकार का बहुमत साबित करना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय ने जिस तरह से अपनी रणनीति बुनी है, उसे देखते हुए फ्लोर टेस्ट महज एक औपचारिकता मात्र हो सकती है।
द्रमुक की प्रतिक्रिया और चेन्नई का सियासी मिजाज
तमिलनाडु की सत्ता के इस बड़े बदलाव के बीच मौजूदा सत्तारूढ़ दल द्रमुक (DMK) के खेमे में भी काफी सक्रियता देखी जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि जहां एक तरफ विजय की ताजपोशी की तैयारी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ द्रमुक समर्थक इस पूरी स्थिति का श्रेय एम.के. स्टालिन की कार्यशैली और राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दे रहे हैं। चेन्नई की सड़कों पर उत्सव जैसा माहौल है, जहां भारी संख्या में लोग अपने नए नेता का स्वागत करने के लिए उमड़ रहे हैं। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है, क्योंकि विजय की लोकप्रियता को देखते हुए भारी भीड़ जुटने की संभावना है।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: तमिलनाडु की गति बनाम केरल का सस्पेंस
तमिलनाडु के इस त्वरित राजनीतिक घटनाक्रम की तुलना अब पड़ोसी राज्य केरल से की जा रही है। जहां तमिलनाडु में 'विजय ड्रामा' अपने सुखद अंत की ओर है और मुख्यमंत्री का चेहरा साफ हो चुका है, वहीं केरल में कांग्रेस के भीतर की स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है। केरल में कांग्रेस अभी तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगा पाई है, जिसके कारण वहां की जनता और राजनीतिक हलकों में संशय बरकरार है। तमिलनाडु में विजय की इस तेजतर्रार राजनीतिक बढ़त ने क्षेत्रीय दलों के लिए एक नई मिसाल पेश की है कि किस तरह सिनेमाई लोकप्रियता को एक संगठित राजनीतिक शक्ति में बदला जा सकता है।
निष्कर्ष: तमिलनाडु की राजनीति ने हमेशा से ही देश को चौंकाया है, चाहे वह एमजीआर का दौर हो या जयललिता का। थलपति विजय का मुख्यमंत्री के रूप में उदय होना राज्य की उसी परंपरा का विस्तार है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विजय अपनी फिल्मी छवि से हटकर एक कुशल प्रशासक के रूप में तमिलनाडु की जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं। फिलहाल, चेन्नई से लेकर दिल्ली तक, सबकी नजरें कल होने वाले शपथ ग्रहण पर टिकी हैं।
Comments
Post a Comment