त्विषा शर्मा मौत मामला: पूर्व जज गिरिबाला सिंह को सीबीआई ने किया गिरफ्तार; सबूतों से छेड़छाड़ और गंभीर चोटों के निशान बने आधार
नई दिल्ली/प्रयागराज: कानून की रक्षक रहीं एक पूर्व न्यायाधीश अब खुद कानून के शिकंजे में हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी बहू त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के मात्र 17 घंटे के भीतर की गई है। सीबीआई की इस कार्रवाई ने कानूनी और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि आरोपी खुद एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी हैं।
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, गिरिबाला सिंह से लगभग छह घंटे से अधिक समय तक सघन पूछताछ की गई। जांच एजेंसी ने पाया कि उनके जवाबों में निरंतर विरोधाभास था और वे जांच में सहयोग नहीं कर रही थीं। इसके बाद, साक्ष्यों के आधार पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई अब उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है, ताकि घटना की कड़ियां जोड़ी जा सकें।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और जमानत याचिका खारिज
इससे पहले, गिरिबाला सिंह ने गिरफ्तारी से बचने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने उनकी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति ने स्पष्ट रूप से कहा कि "अपराध की प्रकृति अत्यंत गंभीर है" और आरोपी के रसूख को देखते हुए उन्हें राहत प्रदान नहीं की जा सकती। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि आरोपी एक सेवानिवृत्त जज हैं, जिनके पास कानून की गहरी समझ है, और उनकी स्वतंत्र मौजूदगी जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी थी कि त्विषा शर्मा की मौत कोई सामान्य घटना नहीं थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि त्विषा के शरीर पर छह गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे। ये चोटें इस ओर इशारा करती हैं कि उनकी मृत्यु से पहले उनके साथ शारीरिक संघर्ष या हिंसा हुई थी। कोर्ट ने इन तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए माना कि प्रथम दृष्टया यह मामला हत्या और साक्ष्यों को मिटाने के गंभीर आरोपों से जुड़ा प्रतीत होता है।
क्राइम सीन मैनेजमेंट में विशेषज्ञता और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप
इस केस में सबसे चौंकाने वाला खुलासा गिरिबाला सिंह की पृष्ठभूमि को लेकर हुआ है। जांच में यह बात सामने आई है कि पूर्व जज ने अपने कार्यकाल के दौरान 'क्राइम सीन मैनेजमेंट' (अपराध स्थल प्रबंधन) में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया था। सीबीआई का आरोप है कि इस विशेषज्ञता का इस्तेमाल उन्होंने कथित तौर पर अपराध के साक्ष्यों को नष्ट करने या उन्हें बदलने के लिए किया।
जांच एजेंसी को संदेह है कि त्विषा की मौत के तुरंत बाद घटनास्थल के साथ छेड़छाड़ की गई थी ताकि इसे आत्महत्या या दुर्घटना का रूप दिया जा सके। एक पेशेवर की तरह सबूतों को मिटाने की कोशिश ने सीबीआई के संदेह को पुख्ता किया है। इसके अलावा, कुछ महत्वपूर्ण व्हाट्सएप चैट्स भी बरामद किए गए हैं, जो इस ओर संकेत करते हैं कि आरोपी परिवार के सदस्य जांच को प्रभावित करने और गवाहों को डराने का प्रयास कर रहे थे।
जांच का दायरा और आगे की राह
त्विषा शर्मा की मौत के बाद से ही उनके मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न और हत्या के आरोप लगाए थे। सीबीआई ने जब इस मामले को अपने हाथ में लिया, तो कई ऐसे तकनीकी साक्ष्य मिले जिन्हें स्थानीय पुलिस की शुरुआती जांच में नजरअंदाज कर दिया गया था। अब सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस साजिश में अन्य लोग भी शामिल थे और क्या किसी अन्य प्रभावशाली व्यक्ति ने साक्ष्यों को दबाने में मदद की थी।
वर्ल्ड प्रेस इंडिया के कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि एक पूर्व जज की गिरफ्तारी यह संदेश देती है कि कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, न्याय से ऊपर नहीं है। गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि त्विषा शर्मा के परिवार को जल्द ही न्याय मिलेगा और इस रहस्यमयी मौत के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आएगी।
फिलहाल, गिरिबाला सिंह को विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां सीबीआई उनकी अधिकतम दिनों की कस्टडी की मांग करेगी। आने वाले दिनों में कुछ और महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां और बड़े खुलासे होने की संभावना है, जो इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा तय करेंगे।
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