Iran War: अमेरिका को ईरान की खुली चुनौती: 'सीजफायर तोड़ा तो खैर नहीं', मार गिराया अमेरिकी MQ-9 ड्रोन - Navbharat Times
मध्य पूर्व में महायुद्ध की आहट: ईरान ने मार गिराया अमेरिकी MQ-9 ड्रोन, अमेरिका की जवाबी कार्रवाई से तनाव चरम पर
मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में एक बार फिर युद्ध के बादल गहरे होते जा रहे हैं। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से वापसी की राह कठिन नजर आ रही है। ताजा घटनाक्रम में, ईरान ने अमेरिकी सेना के सबसे आधुनिक और घातक हथियारों में से एक, MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। इस घटना ने न केवल वाशिंगटन को अचंभित किया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में पूर्ण पैमाने पर युद्ध की आशंका को जन्म दे दिया है। विश्व प्रेस इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान द्वारा अमेरिका को दी गई एक सीधी और खुली सैन्य चुनौती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास संघर्ष: अमेरिकी जवाबी हमले
ईरानी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के अनुसार, अमेरिकी ड्रोन को उस समय निशाना बनाया गया जब वह कथित तौर पर ईरानी हवाई क्षेत्र के करीब जासूसी मिशन पर था। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन के गिराए जाने के तुरंत बाद अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी नौसेना ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की उन तेज रफ्तार नौकाओं को निशाना बनाया है, जो इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन के लिए खतरा बनी हुई थीं। इसके साथ ही, ईरान की मिसाइल साइटों पर भी हमले की खबरें आ रही हैं, जिससे स्थिति और अधिक विस्फोटक हो गई है।
MQ-9 रीपर ड्रोन का गिरना अमेरिका के लिए एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक नुकसान है। लगभग 30 मिलियन डॉलर की लागत वाला यह ड्रोन न केवल निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाता है, बल्कि यह सटीक मिसाइल हमले करने में भी सक्षम है। ईरान द्वारा इसे गिराया जाना उसकी उन्नत वायु रक्षा प्रणाली की क्षमताओं को दर्शाता है, जो क्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
मोजताबा खामेनेई की चेतावनी: 'सुरक्षित पनाहगाह का अंत'
कूटनीतिक मोर्चे पर भी ईरान ने अपने तेवर सख्त कर लिए हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता के संभावित उत्तराधिकारी माने जाने वाले मोजताबा खामेनेई ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि अब 'मिडल ईस्ट में अमेरिका को कहीं भी सुरक्षित पनाह नहीं मिलेगी'। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका ने सीजफायर की शर्तों का उल्लंघन किया या ईरान की संप्रभुता पर हमला जारी रखा, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों और उनके सहयोगियों को इसका भारी खामियाजा भुगतना होगा।
ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वे युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। ईरान ने अमेरिका को ललकारते हुए कहा है कि यदि उसने दोबारा ईरान के आसमान या जमीन को छूने की कोशिश की, तो इसका जवाब 'विनाशकारी' होगा। इस बयानबाजी ने क्षेत्रीय देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई और इजरायल को भी हाई अलर्ट पर रहने को मजबूर कर दिया है।
परमाणु कार्यक्रम और ट्रंप को संदेश: भारत की धरती से कड़ा रुख
तनाव की इस आग में घी डालने का काम ईरान के उस बयान ने किया है, जिसमें उसने सीधे तौर पर नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संबोधित किया है। हाल ही में भारत में एक कार्यक्रम के दौरान ईरानी प्रतिनिधियों ने कहा कि अमेरिका का यह सपना कि वह युद्ध या प्रतिबंधों के जरिए ईरान से उसका यूरेनियम छीन लेगा, कभी पूरा नहीं होगा। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम उसकी संप्रभुता का हिस्सा है और इसे किसी भी कीमत पर रोका नहीं जाएगा।
ईरानी नेतृत्व ने ट्रंप के पुराने 'मैक्सिमम प्रेशर' (अत्यधिक दबाव) की नीति को एक 'टूटा हुआ सपना' करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि अमेरिका युद्ध के माध्यम से यूरेनियम छीन सकता, तो वह बहुत पहले ऐसा कर चुका होता। यह बयान उस समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान के परमाणु संवर्धन की बढ़ती गति को लेकर चिंतित है।
वैश्विक प्रभाव और कूटनीतिक गतिरोध
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच यह छद्म युद्ध (Proxy War) सीधे संघर्ष में बदलता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके विनाशकारी परिणाम होंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कच्चे तेल की आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। यहां किसी भी प्रकार का सैन्य अवरोध कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा सकता है, जिससे भारत सहित पूरी दुनिया में महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है।
फिलहाल, स्थिति यह है कि दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अमेरिका अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है, तो वहीं ईरान अपनी मिसाइल और ड्रोन शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति इस समय पूरी तरह विफल नजर आ रही है। क्या विश्व एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है? इसका उत्तर आने वाले कुछ दिनों में होने वाली सैन्य गतिविधियों और पेंटागन की अगली रणनीतिक चाल पर निर्भर करेगा। विश्व प्रेस इंडिया इस संवेदनशील मुद्दे पर निरंतर नजर बनाए हुए है।
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