फिर भड़की ईरान-अमेरिका जंग? US सेना ने बोला हमला, होर्मुज से सटे बंदर अब्बास में धमाके - Hindustan Hindi News
मध्य पूर्व में महायुद्ध की आहट? ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य संघर्ष तेज, होर्मुज के पास भीषण धमाके
नई दिल्ली/तेहरान: मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच दशकों पुराने तनाव ने अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास स्थित ईरानी बंदरगाह बंदर अब्बास में भीषण धमाकों की आवाज सुनी गई है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर लक्षित हमले किए हैं, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। विश्व प्रेस इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह सैन्य टकराव वैश्विक तेल आपूर्ति और वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।
अमेरिकी कार्रवाई और बंदर अब्बास में गूँजते धमाके
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने होर्मुज के पास स्थित ईरानी सैन्य ठिकानों और मिसाइल साइटों को निशाना बनाया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बंदर अब्बास के पास आसमान में धुएं के गुबार और तेज धमाकों की पुष्टि की है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला हाल के दिनों में ईरानी समर्थित समूहों द्वारा अमेरिकी संपत्तियों पर किए गए हमलों के जवाब में हो सकता है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने आधिकारिक तौर पर कड़े शब्दों में कहा है कि वे अपने हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
दूसरी ओर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। ईरान का दावा है कि अमेरिका ने जानबूझकर नागरिक बुनियादी ढांचे के करीब हमला किया है। हालांकि, अमेरिकी सूत्रों का कहना है कि हमले केवल उन 'फास्ट बोट्स' और मिसाइल लॉन्चिंग पैड्स पर किए गए थे, जो अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जहाजों के लिए खतरा पैदा कर रहे थे।
ईरान का पलटवार: MQ-9 रीपर ड्रोन गिराने का दावा
इस सैन्य टकराव के बीच ईरान ने एक बड़ा दावा किया है। ईरानी मीडिया और सैन्य अधिकारियों के अनुसार, उनके वायु रक्षा तंत्र ने एक अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया है। यह ड्रोन अत्यंत आधुनिक और महंगा माना जाता है, जिसका उपयोग जासूसी और सटीक हमलों के लिए किया जाता है। IRGC ने एक बयान जारी कर कहा है कि उनके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने वाले किसी भी विदेशी उपकरण को नष्ट कर दिया जाएगा।
हालांकि, अमेरिका ने अभी तक अपने ड्रोन के गिरने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन सैन्य सूत्रों ने स्वीकार किया है कि एक ड्रोन के साथ संपर्क टूट गया है। यदि ईरान का यह दावा सच साबित होता है, तो यह तकनीक और मनोबल के लिहाज से अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका होगा और तनाव को और अधिक बढ़ा सकता है।
'कहीं नहीं मिलेगी पनाह': मोजताबा खामेनेई की खुली चुनौती
युद्ध की इस स्थिति के बीच ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे, मोजताबा खामेनेई ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि "मिडिल ईस्ट में अब अमेरिका को कहीं भी सुरक्षित पनाह नहीं मिलेगी।" उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की मिसाइलें क्षेत्र के हर उस कोने तक पहुँचने में सक्षम हैं जहाँ अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोजताबा खामेनेई का यह बयान इस ओर इशारा करता है कि ईरान इस बार केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रुख अपनाने के मूड में है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल और लेबनान सीमा पर भी तनाव चरम पर है, जिससे एक बहुपक्षीय क्षेत्रीय युद्ध की संभावना बढ़ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। दुनिया के कुल कच्चे तेल के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यदि ईरान और अमेरिका के बीच पूर्ण युद्ध छिड़ता है और यह मार्ग बाधित होता है, तो वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी तेल जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, यह स्थिति चिंताजनक है।
भारतीय विदेश मंत्रालय इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है। भारतीय हितों और क्षेत्र में रहने वाले लाखों प्रवासियों की सुरक्षा को देखते हुए भारत ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। हालांकि, ईरान की ओर से हाल के दिनों में भारत की धरती से अमेरिका को दी गई ललकार ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। अमेरिकी सांसद मार्को रुबियो जैसे नेताओं ने ईरान की इन धमकियों पर चिंता जताई है और बाइडेन प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है।
निष्कर्ष: क्या कूटनीति के लिए अभी भी जगह है?
वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि तनाव कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। एक तरफ अमेरिका अपनी सैन्य श्रेष्ठता के जरिए दबाव बनाना चाहता है, तो दूसरी तरफ ईरान अपनी मिसाइल ताकत और ड्रोन तकनीक के जरिए जवाब दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र, को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है। यदि युद्ध की आग को समय रहते नहीं बुझाया गया, तो इसका खामियाजा न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है। वर्ल्ड प्रेस इंडिया इस घटनाक्रम की हर छोटी-बड़ी जानकारी आप तक पहुँचाता रहेगा।
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