कसाब को फांसी दिलाने वाले उज्ज्वल निकम की केतन केस में एंट्री, लड़ेंगे पीड़ित परिवार का केस - AajTak
केतन अग्रवाल हत्याकांड: कसाब को फांसी दिलाने वाले उज्ज्वल निकम की एंट्री, क्या खुलेगा मौत का खौफनाक राज?
महाराष्ट्र के लोनावला स्थित लोहागढ़ किले में हुए सनसनीखेज केतन अग्रवाल हत्याकांड ने अब एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मामले में न्याय की गुहार लगा रहे पीड़ित परिवार को एक बड़ी मजबूती मिली है। देश के दिग्गज और चर्चित सरकारी वकील उज्ज्वल निकम, जिन्होंने मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाया था, अब इस केस में पीड़ित परिवार का पक्ष रखेंगे। निकम की इस केस में एंट्री ने जांच एजेंसियों और आरोपियों के खेमे में हलचल तेज कर दी है।
लोहागढ़ किले के दुर्गम रास्तों और गहरी खाइयों के बीच हुई केतन की मौत को शुरुआत में एक दुर्घटना या आत्महत्या के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन पुलिस की गहरी तफ्तीश और फॉरेंसिक साक्ष्यों ने एक बड़ी साजिश की ओर इशारा किया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि यह महज कोई हादसा नहीं, बल्कि सोच-समझकर रची गई एक हत्या है। इसी सिलसिले में परिवार ने महाराष्ट्र सरकार से उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की मांग की थी, जिसे अब अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
गूगल पर 'Death Point' की तलाश और खौफनाक रिहर्सल
पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं हैं। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है कि केतन की दोस्त सिया और केतन ने घटना से पहले गूगल पर कई संदिग्ध चीजें सर्च की थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपियों ने गूगल पर 'डेथ पॉइंट' और ऐसी जगहों की तलाश की थी, जहां से गिरकर बचने की संभावना न के बराबर हो। इतना ही नहीं, यह भी सामने आया है कि वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने लोहागढ़ किले का दौरा किया था और वहां बाकायदा 'रिहर्सल' की गई थी।
एफआईआर के मुताबिक, घटना वाले दिन सिया का व्यवहार बेहद असामान्य था। वह बार-बार नखरे दिखा रही थी और केतन को किले के एक विशेष छोर तक ले जाने की कोशिश कर रही थी। पुलिस का मानना है कि यह सब एक पूर्व नियोजित योजना का हिस्सा था ताकि केतन को उस बिंदु तक लाया जा सके जहां से उसे मौत के घाट उतारा जा सके।
फॉरेंसिक साक्ष्य और 'सिग्नल' वाली थ्योरी
जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल और केतन के पास से कुछ महत्वपूर्ण चीजें मिली हैं, जिनमें एक बाइक, हुडी और हेडफोन शामिल हैं। पुलिस अब 'सिग्नल थ्योरी' पर काम कर रही है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों का मानना है कि हेडफोन और हुडी का इस्तेमाल एक-दूसरे को गुप्त संदेश या इशारा देने के लिए किया गया होगा। पुलिस को संदेह है कि वारदात के वक्त कोई तीसरा व्यक्ति भी आसपास मौजूद हो सकता था, जिसे हेडफोन के जरिए सिग्नल दिया गया।
पुलिस पूछताछ में सिया और अन्य संदिग्धों ने पहले से तैयार जवाब दिए थे, जिससे जांचकर्ताओं को शक हुआ कि उन्हें पुलिसिया सवालों का सामना करने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। हालांकि, डिजिटल फुटप्रिंट्स और फॉरेंसिक रिपोर्ट अब आरोपियों के दावों की पोल खोल रही हैं।
क्रिकेट के मैदान से मौत की खाई तक: एक अधूरी प्रेम कहानी
केतन और सिया की मुलाकात की कहानी भी काफी दिलचस्प है। केतन के भाई के अनुसार, दोनों की नजदीकी क्रिकेट के खेल की वजह से बढ़ी थी। दोनों एक ही खेल के प्रति उत्साही थे और धीरे-धीरे उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई। हालांकि, यह प्रेम कहानी इतनी जल्दी और इतने भयावह तरीके से समाप्त होगी, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। परिवार का कहना है कि केतन एक खुशमिजाज इंसान था और उसके जीवन में आत्महत्या जैसा कोई कारण नहीं था।
न्याय की उम्मीद: उज्ज्वल निकम की भूमिका
उज्ज्वल निकम की पहचान देश के सबसे सख्त और सफल अभियोजकों में होती है। 1993 के मुंबई धमाकों से लेकर 26/11 के आतंकी हमले तक, उन्होंने कई जटिल मामलों को तार्किक परिणति तक पहुंचाया है। केतन अग्रवाल के परिवार का मानना है कि उज्ज्वल निकम की पैरवी से पुलिस की चार्जशीट और मजबूत होगी और वे तमाम डिजिटल सबूतों को अदालत में इस तरह पेश करेंगे कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिल सके।
वर्ल्ड प्रेस इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में अभी कई और गिरफ्तारियां संभव हैं। पुलिस की एक टीम तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डेटा रिकॉर्ड्स (CDR) का विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस षड्यंत्र में और कौन-कौन शामिल था। उज्ज्वल निकम के आने से अब यह तय माना जा रहा है कि केस की सुनवाई फास्ट ट्रैक मोड में होगी और सच जल्द ही दुनिया के सामने आएगा।
Comments
Post a Comment