भारत-सेशेल्स संबंधों का स्वर्णिम अध्याय: प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान और द्विपक्षीय संबंधों की नई इबारत
हिंद महासागर में भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'सागर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) नीति को एक बड़ी कूटनीतिक जीत मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा ने न केवल दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को प्रगाढ़ किया है, बल्कि सामरिक और सुरक्षा की दृष्टि से भी एक नए युग की शुरुआत की है। सेशेल्स के राष्ट्रपति वेवल रामकलावन ने प्रधानमंत्री मोदी को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ (Guardian of the Blue Horizon) से सम्मानित किया। यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय पटल पर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के उनके प्रयासों की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
सामरिक सहयोग और 19 महत्वपूर्ण समझौते
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति रामकलावन के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक के दौरान कुल 19 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का दायरा रक्षा और समुद्री सुरक्षा से लेकर डिजिटल अर्थव्यवस्था और प्रत्यर्पण संधि तक फैला हुआ है। भारत और सेशेल्स के बीच हुए इन समझौतों में सबसे प्रमुख यूपीआई (UPI) कनेक्टिविटी को लेकर हुआ करार है। इसके माध्यम से अब सेशेल्स में भी भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली का लाभ उठाया जा सकेगा, जिससे पर्यटन और व्यापारिक लेन-देन में सुगमता आएगी।
इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने एक प्रत्यर्पण संधि पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जो कानून प्रवर्तन और आपराधिक मामलों में आपसी सहयोग को मजबूती प्रदान करेगी। सुरक्षा के मोर्चे पर, भारत ने सेशेल्स को एक 'मेड-इन-इंडिया' फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) उपहार स्वरूप सौंपा है। यह जहाज सेशेल्स की समुद्री सीमाओं की निगरानी और तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा। प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि भारत, सेशेल्स की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: जब भारत ने बचाया था सेशेल्स का लोकतंत्र
भारत और सेशेल्स के संबंधों की जड़ें अत्यंत गहरी हैं। इस यात्रा के दौरान उस ऐतिहासिक घटना का भी स्मरण किया गया जब भारत ने सेशेल्स को एक बड़े राजनीतिक संकट से उबारा था। साल 1986 में, भारत ने 'ऑपरेशन फ्लॉवर आर ब्लूमिंग' के तहत सेशेल्स में तख्तापलट की कोशिश को नाकाम किया था। उस समय तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस-अल्बर्ट रेने के खिलाफ सेना के एक गुट ने विद्रोह कर दिया था। भारत ने तुरंत अपनी नौसेना का युद्धपोत 'आईएनएस विंध्यगिरी' भेजकर लोकतांत्रिक सरकार की रक्षा की थी। यह घटना आज भी दोनों देशों के बीच अटूट विश्वास का आधार मानी जाती है।
समुद्री सुरक्षा और 'ब्लू इकोनॉमी' पर जोर
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच सेशेल्स के साथ भारत की यह साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में 'ब्लू इकोनॉमी' और समुद्री संसाधनों के सतत विकास पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि सेशेल्स भारत के लिए केवल एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि हिंद महासागर की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
संयुक्त प्रेस वक्तव्य के दौरान पीएम मोदी ने कहा, "हमारी साझेदारी केवल द्विपक्षीय नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए आवश्यक है। भारत और सेशेल्स मिलकर समुद्री डकैती, नशीली दवाओं की तस्करी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।" सेशेल्स के राष्ट्रपति ने भी भारत को एक 'विश्वस्त मित्र' बताते हुए विकास कार्यों में निरंतर सहायता के लिए आभार व्यक्त किया।
निष्कर्ष: भविष्य की राह
प्रधानमंत्री मोदी को मिला यह सम्मान और 19 बड़े समझौतों की घोषणा भारत की 'सॉफ्ट पावर' और 'हार्ड पावर' के अद्भुत समन्वय को दर्शाती है। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भारत द्वारा प्रदान की गई अनुदान सहायता और रक्षा उपकरणों की आपूर्ति ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत क्षेत्र में एक 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह सक्षम है। यह यात्रा न केवल कूटनीतिक रूप से सफल रही, बल्कि इसने आने वाले दशकों के लिए भारत-सेशेल्स मैत्री की एक मजबूत आधारशिला रख दी है।
वर्ल्ड प्रेस इंडिया ब्यूरो की रिपोर्ट।
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