चंपत राय के इस्तीफे की स्क्रिप्ट हरिद्वार में लिखी गई: RSS ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर फटकार लगाई, 25 जून क... - Dainik Bhaskar
अयोध्या राम मंदिर विवाद: चंपत राय के इस्तीफे की पटकथा और चढ़ावा चोरी का गहराता संकट
अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन की देखरेख करने वाले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लगता नजर आ रहा है। विश्वसनीय सूत्रों और हालिया घटनाक्रमों के अनुसार, चंपत राय के इस्तीफे की पूरी पटकथा उत्तराखंड के हरिद्वार में लिखी जा चुकी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शीर्ष नेतृत्व ने राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले और पिछले कुछ समय से ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
RSS की कड़ी फटकार और हरिद्वार की गुप्त बैठक
हाल ही में हरिद्वार में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में राम मंदिर की सुरक्षा, प्रबंधन और हाल ही में सामने आए वित्तीय अनियमितताओं के मामलों पर विस्तृत चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि संघ नेतृत्व ने चंपत राय को स्पष्ट रूप से फटकार लगाई है। मंदिर के दान पात्र से बड़ी राशि की चोरी होना न केवल सुरक्षा में एक बड़ी चूक है, बल्कि इसने करोड़ों भक्तों की आस्था को भी ठेस पहुंचाई है।
बताया जा रहा है कि 25 जून को हुई एक उच्च स्तरीय चर्चा के बाद यह तय कर लिया गया कि चंपत राय को अब अपने पद से मुक्त होना होगा। संघ का मानना है कि मंदिर के गर्भगृह और परिसर में होने वाली गतिविधियों पर ट्रस्ट का नियंत्रण कमजोर पड़ा है, जिसके कारण 'चढ़ावा चोरी' जैसी शर्मनाक घटनाएं सामने आई हैं।
CCTV फुटेज और 5 जून का खुलासा
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब 5 जून का CCTV फुटेज सामने आया। जांच रिपोर्टों के अनुसार, चंपत राय को चढ़ावा चोरी का शक काफी पहले से था, लेकिन इसके बावजूद समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई। फुटेज में संदिग्ध गतिविधियों को देखने के बाद भी प्रशासन और ट्रस्ट के स्तर पर बरती गई ढिलाई अब चंपत राय की विदाई का मुख्य कारण बन रही है। सुरक्षा तंत्र में इस तरह की लापरवाही ने संघ और सरकार दोनों को असहज कर दिया है।
पुलिसिया कार्रवाई: 8 ठिकानों पर छापेमारी और लाखों की बरामदगी
चंदा और चढ़ावा चोरी का मामला केवल आरोपों तक सीमित नहीं रहा है। अयोध्या पुलिस और जांच एजेंसियों ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 8 आरोपियों के घरों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई में अब तक 79.85 लाख रुपये की नकद राशि बरामद की जा चुकी है। इतनी बड़ी रकम का निजी आवासों से बरामद होना इस बात की पुष्टि करता है कि मंदिर की दान राशि में एक संगठित गिरोह सेंध लगा रहा था। इस खुलासे के बाद ट्रस्ट की पारदर्शिता पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं।
बीजेपी MLC का तीखा हमला: राय और मिश्रा को बताया 'डकैत'
राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक एमएलसी ने चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य अनिल मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इन अधिकारियों को 'डकैत' संबोधित करते हुए राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। सत्ता पक्ष के भीतर से ही उठ रही इस तरह की आवाजें यह दर्शाती हैं कि चंपत राय ने अपना राजनीतिक और सामाजिक आधार खो दिया है।
विवादों का पुराना नाता: भूमि खरीद से लेकर विदाई तक
चंपत राय के लिए यह पहली बार नहीं है जब वे विवादों के घेरे में आए हों। इससे पहले राम मंदिर के लिए खरीदी गई जमीन के सौदों में भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। उस समय विपक्ष ने 'जमीन घोटाले' का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। हालांकि, उस वक्त संघ और बीजेपी नेतृत्व ने उनका बचाव किया था, लेकिन इस बार मामला सीधे भक्तों के चढ़ावे की चोरी से जुड़ा है। 'बेफिक्री' और 'लापरवाही' का जो रवैया उन्होंने पूर्व के विवादों में दिखाया था, वही अब उनकी विदाई की सबसे बड़ी वजह बन गया है।
वर्ल्ड प्रेस इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चंपत राय का इस्तीफा केवल समय की बात है। हरिद्वार में लिखी गई यह स्क्रिप्ट जल्द ही एक आधिकारिक घोषणा के रूप में सामने आएगी। राम मंदिर जैसे पवित्र स्थल के प्रबंधन में शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संघ अब किसी नए और विवादरहित चेहरे को यह जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी में है।
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