Sayani Ghosh Networth: अब ममता की 'सयानी' भी बागी, 17 की उम्र में बनी थीं हीरोइन, इतनी है TMC सांसद की नेटवर्थ - AajTak
ममता बनर्जी को बड़ा झटका: ग्लैमर की दुनिया से राजनीति में आईं सयानी घोष के बागी तेवर, क्या ढह रहा है टीएमसी का किला?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिल रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष की लहर अब सतह पर आ गई है। कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बेहद करीबी और भरोसेमंद मानी जाने वाली सांसद सयानी घोष के बागी तेवरों ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सयानी घोष, जिन्होंने 17 साल की उम्र में अभिनय की दुनिया में कदम रखा था और बाद में राजनीति के मैदान में अपनी धाक जमाई, अब पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खड़ी नजर आ रही हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब टीएमसी पहले से ही कई प्रमुख नेताओं के इस्तीफे और विद्रोह का सामना कर रही है।
ग्लैमर से राजनीति तक का सफर और सयानी घोष की नेटवर्थ
सयानी घोष का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। मात्र 17 साल की उम्र में एक अभिनेत्री के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाली सयानी ने बहुत कम समय में बंगाली सिनेमा में अपनी पहचान बना ली थी। साल 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान ममता बनर्जी ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें राजनीति के मुख्य मंच पर लेकर आईं। सयानी की लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें टीएमसी की युवा इकाई का अध्यक्ष बनाया गया और बाद में वह संसद तक पहुंचीं।
मीडिया रिपोर्ट्स और चुनावी हलफनामों के अनुसार, सयानी घोष की नेटवर्थ भी चर्चा का विषय रही है। एक अभिनेत्री और अब सांसद के रूप में, उनकी कुल संपत्ति करोड़ों में आंकी गई है। उनके पास कोलकाता के पॉश इलाकों में अचल संपत्ति के साथ-साथ लग्जरी गाड़ियों का भी काफिला है। हालांकि, उनकी बढ़ती संपत्ति और राजनीतिक रसूख के साथ-साथ विवादों ने भी उनका पीछा नहीं छोड़ा है, विशेषकर शिक्षक भर्ती घोटाले के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूछताछ के बाद वह लगातार सुर्ख़ियों में बनी रहीं।
'ममता की सयानी' के बदले सुर: वफादारी से बगावत तक
एक समय था जब सयानी घोष ममता बनर्जी को देश के 'भावी प्रधानमंत्री' के रूप में प्रोजेक्ट करती थीं। उन्होंने हर मोर्चे पर अपनी पार्टी और सुप्रीमो का बचाव किया। लेकिन अचानक उनके बदले हुए सुरों ने सबको चौंका दिया है। रिपोर्ट्स की मानें तो सयानी अब उन बागी नेताओं की सूची में शामिल हो गई हैं जो पार्टी के कामकाज के तरीके और नेतृत्व से खुश नहीं हैं।
सयानी के इस रुख को ममता बनर्जी के लिए एक व्यक्तिगत झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने सयानी को न केवल टिकट दिया, बल्कि उन्हें पार्टी के भीतर तेजी से आगे बढ़ने के अवसर भी प्रदान किए। सयानी के साथ-साथ 'काबा-मदीना' गाने को लेकर हुए विवादों ने भी उनकी छवि पर असर डाला था, लेकिन उस वक्त पूरी पार्टी उनके साथ खड़ी थी। अब वही सयानी पार्टी से अलग राह चुनती दिख रही हैं।
टीएमसी में भगदड़: 58 विधायक और 20 सांसदों ने छोड़ा साथ
सयानी घोष का विद्रोह कोई इकलौती घटना नहीं है। तृणमूल कांग्रेस वर्तमान में अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक 58 विधायक और 20 लोकसभा सांसद ममता बनर्जी का साथ छोड़ चुके हैं। यह टूट केवल निचले स्तर पर नहीं, बल्कि शीर्ष स्तर पर भी स्पष्ट दिखाई दे रही है। हाल ही में एक और राज्यसभा सांसद के इस्तीफे ने अभिषेक बनर्जी की रणनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
हैरानी की बात यह है कि बागियों की इस संभावित सूची में दिग्गज नेता शत्रुघन सिन्हा का नाम भी चर्चा में है। 19 सांसदों की एक नई लिस्ट वायरल हो रही है, जिसमें पार्टी के कई बड़े चेहरों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। यदि यह टूट इसी तरह जारी रही, तो आगामी चुनावों में टीएमसी के लिए अपनी साख बचाना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
निष्कर्ष: पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण
सयानी घोष जैसी युवा और प्रभावशाली नेता का बागी होना यह दर्शाता है कि टीएमसी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। विचारधारा की लड़ाई हो या व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, ममता बनर्जी का 'अजेय' माना जाने वाला किला अब दरकता हुआ दिखाई दे रहा है। नेताओं का एक बड़ा समूह अब विकल्प तलाश रहा है, जिससे पश्चिम बंगाल की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी इस बिखराव को रोकने के लिए क्या कदम उठाते हैं, या फिर बंगाल की राजनीति में किसी नए युग की शुरुआत होने वाली है।
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