Sayani Ghosh Networth: अब ममता की 'सयानी' भी बागी, 17 की उम्र में बनी थीं हीरोइन, इतनी है TMC सांसद की नेटवर्थ - AajTak
ममता बनर्जी को बड़ा झटका: सयानी घोष समेत 19 सांसदों की बगावत, जानिए अभिनेत्री से सांसद बनीं सयानी की संपत्ति और सियासी सफर
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुखिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के भीतर असंतोष की लहर इतनी गहरी हो गई है कि अब एक-एक कर उनके सबसे करीबी और भरोसेमंद चेहरे भी बागी तेवर अपना रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में, ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वाली सांसद सयानी घोष का नाम भी उन 19 बागी सांसदों की सूची में शामिल हो गया है, जो पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। अभिनेत्री से राजनेता बनीं सयानी घोष के इस कदम ने न केवल बंगाल बल्कि देश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है।
TMC में बड़ी टूट: 19 सांसद और दर्जनों विधायकों के बागी तेवर
तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे इस घमासान ने ममता बनर्जी की नींद उड़ा दी है। खबरों के अनुसार, पार्टी के 19 लोकसभा सांसदों ने बगावती रुख अख्तियार कर लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सूची में न केवल सयानी घोष, बल्कि दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। केवल सांसद ही नहीं, बल्कि अब तक 58 विधायक और 2 राज्यसभा सांसदों के भी पाला बदलने या पार्टी नीतियों के खिलाफ जाने की अटकलें तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह असंतोष जल्द नहीं थमा, तो आगामी चुनावों में टीएमसी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
17 की उम्र में करियर की शुरुआत और सयानी घोष की नेटवर्थ
सयानी घोष का सफर बेहद दिलचस्प रहा है। उन्होंने मात्र 17 साल की उम्र में अभिनय की दुनिया में कदम रखा था और देखते ही देखते बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री का एक जाना-माना चेहरा बन गईं। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए ही ममता बनर्जी ने उन्हें राजनीति के मैदान में उतारा था। अगर उनकी संपत्ति (Net Worth) की बात करें, तो चुनावी हलफनामों और हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सयानी घोष करोड़ों की संपत्ति की मालकिन हैं। उनके पास कोलकाता में आलीशान फ्लैट, कई महंगी गाड़ियां और लाखों के आभूषण हैं। अभिनय और विज्ञापनों से होने वाली कमाई के अलावा, राजनीति में आने के बाद भी उनकी संपत्ति में इजाफा दर्ज किया गया है, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
विवादों से पुराना नाता: 'काबा-मदीना' सॉन्ग और राजनीतिक चुनौतियां
सयानी घोष का राजनीतिक करियर विवादों से अछूता नहीं रहा है। वह अक्सर अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर हिंदू संगठनों के निशाने पर रही हैं। कुछ समय पहले 'काबा-मदीना' से जुड़े एक पुराने पोस्ट और गाने को लेकर उन पर जमकर निशाना साधा गया था, जिसे 'ममता को सबसे बड़ा झटका' देने वाले कारकों में से एक माना जा रहा है। विरोधियों का आरोप है कि पार्टी के भीतर एक खास वर्ग को खुश करने की राजनीति अब टीएमसी के अपने ही नेताओं को रास नहीं आ रही है। यही कारण है कि सयानी जैसी युवा नेता भी अब बागी गुट का हिस्सा बनती दिख रही हैं।
शताब्दी रॉय की नाराजगी और ममता के पास बचे विकल्प
सिर्फ सयानी ही नहीं, टीएमसी की एक और कद्दावर नेता और सांसद शताब्दी रॉय ने भी अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की है। शताब्दी रॉय ने हाल ही में खुलासा किया कि वह 4 मई के बाद मुख्यमंत्री से मिली थीं, लेकिन पार्टी के भीतर जिस तरह का माहौल बन रहा है, उससे वह असहज हैं। टीएमसी के दिग्गज सितारों का साथ छोड़ना यह संकेत देता है कि ममता बनर्जी के 'कोर ग्रुप' में सब कुछ ठीक नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही बगावत के बाद ममता बनर्जी के पास कौन से वफादार बचे हैं और वह इस सियासी संकट से कैसे पार पाएंगी?
निष्कर्ष: पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस के लिए यह समय आत्ममंथन का है। सयानी घोष और अन्य बड़े सितारों की बगावत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल 'ग्लैमर' के दम पर राजनीति की राह आसान नहीं होती। ममता बनर्जी को अब न केवल विपक्षी दलों से, बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर सुलग रही विद्रोह की आग से भी निपटना होगा।
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