Sayani Ghosh Networth: अब ममता की 'सयानी' भी बागी, 17 की उम्र में बनी थीं हीरोइन, इतनी है TMC सांसद की नेटवर्थ - AajTak
तृणमूल कांग्रेस में बड़ी बगावत: सायोनी घोष से लेकर शत्रुघ्न सिन्हा तक, क्या ममता बनर्जी का साथ छोड़ रहे हैं दिग्गज सितारे?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आता नजर आ रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रही असंतोष की आग अब खुलकर सामने आने लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के 19 लोकसभा सांसदों, जिनमें कई बड़े फिल्मी सितारे और दिग्गज चेहरे शामिल हैं, के बागी होने की खबरें तेज हैं। इस सूची में सबसे चौंकाने वाला नाम सायोनी घोष का है, जिन्हें कभी ममता बनर्जी का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता था। जादवपुर से सांसद सायोनी के साथ-साथ शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान जैसे दिग्गजों के नाम भी इस कथित बागी सूची में शामिल होने से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
सायोनी घोष: 17 की उम्र में ग्लैमर की दुनिया से राजनीति के शिखर तक
सायोनी घोष की पहचान केवल एक राजनीतिज्ञ के रूप में नहीं, बल्कि बंगाली सिनेमा की एक प्रसिद्ध अभिनेत्री के रूप में भी रही है। उन्होंने महज 17 साल की उम्र में अभिनय की दुनिया में कदम रखा था और देखते ही देखते वह टॉलीवुड की एक बड़ी स्टार बन गईं। साल 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने राजनीति में औपचारिक प्रवेश किया और जल्द ही ममता बनर्जी की 'गुड बुक्स' में शामिल हो गईं। हालिया लोकसभा चुनाव में उन्होंने जादवपुर सीट से बड़ी जीत हासिल की थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, सायोनी की कुल संपत्ति (Net Worth) को लेकर भी काफी चर्चा है। चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनकी संपत्ति करोड़ों में है और उनके पास कोलकाता में आलीशान फ्लैट और कई लग्जरी गाड़ियां हैं। हालांकि, अब उनके बागी तेवरों ने पार्टी आलाकमान की नींद उड़ा दी है।
बगावत की लिस्ट में 'बिहारी बाबू' और यूसुफ पठान का नाम
TMC के भीतर मचे इस घमासान में केवल सायोनी घोष ही अकेली नहीं हैं। खबरों की मानें तो कुल 19 लोकसभा सांसद, 58 विधायक और 2 राज्यसभा सदस्य वर्तमान नेतृत्व से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। आसनसोल से सांसद और 'शॉटगन' के नाम से मशहूर शत्रुघ्न सिन्हा और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान का नाम भी इस बागी सूची में आने से पार्टी की आंतरिक कलह उजागर हो गई है। यह स्थिति ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रही है, क्योंकि इनमें से कई चेहरों ने हालिया चुनाव में पार्टी को बड़ी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। अगर ये दिग्गज साथ छोड़ते हैं, तो बंगाल की राजनीति का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।
महुआ मोइत्रा का बयान और बदलती राजनीतिक केमिस्ट्री
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा के एक बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। महुआ मोइत्रा ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी का सम्मान करती हैं। पार्टी में मची इस उथल-पुथल के बीच महुआ का यह बयान राजनीतिक विशेषज्ञों द्वारा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शुभेंदु अधिकारी कभी ममता बनर्जी के सबसे खास हुआ करते थे और अब उनके धुर विरोधी हैं। महुआ के इस 'सम्मान' वाले बयान को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और भविष्य में संभावित गठबंधन या दलबदल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
निष्कर्ष: ममता बनर्जी के सामने अस्तित्व का संकट?
तृणमूल कांग्रेस के लिए यह समय आत्ममंथन और डैमेज कंट्रोल का है। एक तरफ जहां भाजपा बंगाल में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं पार्टी के भीतर की यह 'बगावत' ममता बनर्जी के दुर्ग को कमजोर कर सकती है। यदि 19 सांसदों और 58 विधायकों की यह नाराजगी किसी ठोस फैसले में बदलती है, तो पश्चिम बंगाल की सरकार पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं। अब देखना यह होगा कि 'दीदी' अपने इन बागियों को मनाने में सफल होती हैं या बंगाल की सत्ता में कोई नया राजनीतिक अध्याय शुरू होने वाला है।
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