मध्य पूर्व में महायुद्ध की शुरुआत? अमेरिका की भीषण बमबारी के बाद ईरान का कुवैत और बहरीन पर पलटवार
मध्य पूर्व में दशकों से जारी तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार को अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के खिलाफ अपनी अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई में से एक को अंजाम देते हुए ईरान और उसके सहयोगियों के 90 से अधिक ठिकानों पर भीषण बमबारी की। इस हमले ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को हिला कर रख दिया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। अमेरिका की इस आक्रामक कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कुवैत और बहरीन में स्थित ठिकानों पर जवाबी हमला किया है, जिससे पूरी दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति का खौफ पैदा हो गया है।
90 सैन्य ठिकानों पर प्रहार और चाबहार पोर्ट का मुद्दा
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के निर्देशों पर की गई इस एयर स्ट्राइक में ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 90 ठिकानों को निशाना बनाया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में ईरान के चाबहार पोर्ट के नजदीकी इलाकों को भी निशाना बनाया गया है, जो भारत के लिए सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ईरानी मीडिया ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इन अमेरिकी हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई है और भारी मात्रा में सैन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। अमेरिका का तर्क है कि यह कार्रवाई उसकी सेना पर पिछले दिनों हुए हमलों का मुंहतोड़ जवाब है, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बता रहा है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई: खाड़ी देशों में तनाव चरम पर
अमेरिका द्वारा की गई बमबारी के कुछ ही घंटों बाद, ईरान ने अपनी रक्षात्मक मुद्रा छोड़ते हुए आक्रामक रुख अपना लिया। ईरान ने न केवल इन हमलों की निंदा की, बल्कि कुवैत और बहरीन पर जवाबी हमला कर युद्ध के दायरे को विस्तृत कर दिया है। खाड़ी के इन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने और महत्वपूर्ण हित जुड़े हुए हैं, जिसके कारण अब यह संघर्ष केवल दो देशों के बीच न रहकर एक क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता जा रहा है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सिलसिला नहीं रुका, तो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो सकती है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा जाएगा।
वैश्विक ऊर्जा संकट: $120 प्रति बैरल की ओर बढ़ता कच्चा तेल
युद्ध की इस आग ने वैश्विक बाजारों को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया है। निवेशकों और अर्थशास्त्रियों के बीच इस बात का डर बैठ गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रही किसी भी तरह की 'डील' का अब औपचारिक अंत (The End) हो चुका है। इस तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो कच्चा तेल जल्द ही $120 प्रति बैरल के स्तर को छू सकता है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह खबर चिंताजनक है, क्योंकि इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और मुद्रास्फीति (महंगाई) पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो जाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा और बदलती वैश्विक कूटनीति
इस भीषण सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने मीडिया को बताया कि कुछ ही देर पहले उनके पास ईरान से एक फोन कॉल आया था। हालांकि उन्होंने बातचीत के विवरण का पूरी तरह खुलासा नहीं किया, लेकिन उनके इस बयान ने जो बाइडन प्रशासन की विदेश नीति पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। ट्रंप के इस दावे से संकेत मिलता है कि अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर राजनीतिक मतभेद गहरा रहे हैं, जिसका सीधा फायदा ईरान उठा सकता है।
निष्कर्ष: वर्तमान परिस्थितियां यह स्पष्ट करती हैं कि मध्य पूर्व एक ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच की यह सीधी भिड़ंत न केवल निर्दोष लोगों की जान ले रही है, बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था को भी मंदी की ओर धकेल रही है। भारत के लिए चाबहार पोर्ट और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण हित दांव पर लगे हैं। अब यह देखना होगा कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक शक्तियां इस संभावित महायुद्ध को रोकने के लिए किस तरह का कूटनीतिक हस्तक्षेप करती हैं। यदि समय रहते तनाव कम नहीं किया गया, तो इसके परिणाम विनाशकारी होंगे।
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