Parliament Monsoon Session LIVE: प्रियंका गांधी के बयान पर संसद में हंगामा, रिजिजू बोले- माफी मांगें - ABP News
संसद का मानसून सत्र: प्रियंका गांधी के तीखे प्रहार और सत्ता पक्ष का पलटवार, किरण रिजिजू ने की माफी की मांग
संसद के वर्तमान मानसून सत्र में उस समय भारी राजनीतिक सरगर्मी और हंगामा देखने को मिला जब वायनाड से नवनिर्वाचित कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में अपना पहला भाषण दिया। प्रियंका गांधी के सदन में प्रवेश और उनके तेवरों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विपक्ष अब और अधिक आक्रामक रुख अपनाने के मूड में है। हालांकि, उनके भाषण के दौरान कई ऐसे मोड़ आए जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक को जन्म दे दिया।
सदन में तल्खी: किरण रिजिजू ने की माफी की मांग
प्रियंका गांधी के संबोधन के दौरान सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब उन्होंने सरकार की नीतियों और विशेष रूप से कुछ मंत्रियों के कामकाज पर टिप्पणी की। प्रियंका गांधी के बयानों को 'तथ्यों से परे' और 'संसदीय गरिमा के प्रतिकूल' बताते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने मोर्चा संभाल लिया। रिजिजू ने सदन में खड़े होकर प्रियंका गांधी के दावों पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि सदन में बिना किसी पुख्ता प्रमाण के आरोप लगाना अनुचित है।
रिजिजू ने कहा, "संसद तथ्यों के आधार पर चलती है, केवल चुनावी भाषणों के आधार पर नहीं। जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं, वह सदन को गुमराह करने जैसा है। इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए।" सत्ता पक्ष के सांसदों ने इस दौरान जमकर नारेबाजी की, जिसके कारण सदन की कार्यवाही में बार-बार व्यवधान उत्पन्न हुआ।
शिक्षा मंत्री पर आरोप और प्रमाण देने की चुनौती
प्रियंका गांधी ने अपने भाषण के दौरान देश की शिक्षा व्यवस्था और नए शिक्षा मंत्री को लेकर भी कुछ गंभीर टिप्पणियां कीं। जब सत्ता पक्ष की ओर से इन टिप्पणियों का विरोध किया गया और उनसे प्रमाण मांगे गए, तो प्रियंका गांधी ने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा, "मैंने सदन में जो कुछ भी कहा है, मैं उसका प्रमाण दूंगी।"
प्रियंका ने आरोप लगाया कि देश के शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता को खतरे में डाला जा रहा है और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने युवाओं का भविष्य अंधकार में डाल दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए। उनके इस बयान के बाद सदन में फिर से हंगामा शुरू हो गया और अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा।
प्रधानमंत्री पर तंज: 'कैमरा नहीं, दिल का एंगल बदलिए'
सोशल मीडिया और जनसंपर्क के मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री के इंस्टाग्राम रील्स और उनके फोटो शूट की चर्चा करते हुए कहा कि देश केवल विज्ञापनों और कैमरों से नहीं चलता। प्रियंका ने चुटकी लेते हुए कहा, "कैमरा नहीं, दिल का एंगल बदलिए।"
उनका इशारा इस ओर था कि सरकार को जनता की जमीनी समस्याओं, जैसे बेरोजगारी और महंगाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि केवल अपनी छवि चमकाने पर। इस टिप्पणी पर विपक्षी सांसदों ने मेजें थपथपाकर उनका स्वागत किया, जबकि भाजपा सांसदों ने इसे प्रधानमंत्री का अपमान करार दिया।
तनाव के बीच हल्के-फुल्के पल: 'मुस्कुरा दीजिए'
हंगामे और शोर-शराबे के बीच सदन में कुछ हल्के-फुल्के पल भी देखने को मिले। भाषण के दौरान जब पीठासीन अधिकारी या सत्ता पक्ष के किसी सदस्य के चेहरे पर नाराजगी दिखी, तो प्रियंका गांधी ने बीच में रुककर कहा, "आप मुझ पर नाराज हो रहे हैं, थोड़ा मुस्कुरा लीजिए।"
प्रियंका की इस अपील पर सदन में मौजूद कई सदस्य अपनी हंसी नहीं रोक पाए और कुछ देर के लिए तनावपूर्ण माहौल ठहाकों में बदल गया। प्रियंका ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति का सम्मान होना चाहिए और चर्चा मुस्कुराते हुए भी की जा सकती है।
वर्ल्ड प्रेस इंडिया का विश्लेषण
संसद में प्रियंका गांधी की यह पहली पारी यह संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में लोकसभा के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ेगा। जहाँ प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी की तरह ही सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा प्रहार करने की रणनीति अपनाई है, वहीं भाजपा ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी आरोप को बिना चुनौती दिए नहीं छोड़ेंगे।
किरण रिजिजू द्वारा माफी की मांग और प्रियंका द्वारा प्रमाण प्रस्तुत करने की बात अब संसदीय समितियों या रिकॉर्ड की जांच का विषय बन सकती है। कुल मिलाकर, मानसून सत्र का यह अध्याय भारतीय राजनीति में प्रियंका गांधी की विधायी सक्रियता की एक आक्रामक शुरुआत के रूप में दर्ज हो गया है।
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