यूएन में शहबाज शरीफ के भाषण पर भारत का पलटवार, पेटल गहलोत ने उड़ा दीं पाकिस्तान के दावों की धज्जियां - India TV Hindi
संयुक्त राष्ट्र में भारत का करारा जवाब: पेटल गहलोत ने शहबाज़ शरीफ के झूठ का किया पर्दाफ़ाश, पाकिस्तान की आतंकी नीति उजागर
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का मंच एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच तीखी राजनयिक जंग का गवाह बना। जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने अपने संबोधन में कश्मीर का राग अलापा और भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाए, तो भारत ने तुरंत और दृढ़ता से इसका जवाब दिया। भारतीय प्रतिनिधि पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के हर दावे की धज्जियां उड़ा दीं और दुनिया के सामने उसके दोहरे मापदंडों तथा आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति का पर्दाफाश किया। यह राजनयिक पलटवार इतना तीखा था कि इसने पाकिस्तान को विश्व मंच पर पूरी तरह से बेनकाब कर दिया।
प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने अपने भाषण में हमेशा की तरह जम्मू-कश्मीर को लेकर मनगढ़ंत आरोप लगाए। उन्होंने आत्मनिर्णय के अधिकार और मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करना था। शरीफ ने दावा किया कि भारत कश्मीर में दमनकारी नीतियां अपना रहा है और क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा पैदा कर रहा है। उन्होंने कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के तहत सुलझाने की बात दोहराई और भारत को बातचीत के लिए राजी करने की अपील की, जबकि उनका अपना देश दशकों से आतंकवाद का पोषण करता रहा है। शरीफ ने अपने देश की आंतरिक समस्याओं, जैसे चरमपंथी हिंसा और आर्थिक अस्थिरता, से ध्यान भटकाने की भी कोशिश की, जिसका आरोप भारत ने अक्सर पाकिस्तान पर लगाया है।
भारत की ओर से जवाब देने के लिए मंच पर आईं प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के हर झूठ का सिलसिलेवार खंडन किया। गहलोत ने अपने तीखे और तार्किक संबोधन में स्पष्ट कर दिया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा। उन्होंने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा कि जिस देश का प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र के मंच से आतंकवाद के पीड़ितों के प्रति सहानुभूति का नाटक कर रहा है, उसी देश ने आतंकवाद को अपनी विदेश नीति का उपकरण बना रखा है। गहलोत ने यह भी रेखांकित किया कि पाकिस्तान को भारत पर आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि वह स्वयं मानवाधिकारों के सबसे बड़े उल्लंघनकर्ताओं में से एक है, खासकर अपने ही अल्पसंख्यकों और बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में।
गहलोत ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक है, जहां आतंकवादी खुलेआम घूमते हैं और उन्हें सरकारी संरक्षण प्राप्त होता है। उन्होंने मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद जैसे कुख्यात आतंकवादियों का जिक्र किया, जिन पर कार्रवाई करने में पाकिस्तान लगातार विफल रहा है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसने ओसामा बिन लादेन को अपने देश में पनाह दी और जिसने जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों को पाला-पोसा। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की यह दोहरी नीति अस्वीकार्य है और वैश्विक शांति के लिए एक गंभीर खतरा है।
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान को मानवाधिकारों पर उपदेश देने के बजाय अपने गिरेबान में झांकने की सलाह दी। उन्होंने बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध में मानवाधिकारों के व्यापक उल्लंघन, अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और लापता व्यक्तियों के मामलों पर पाकिस्तान को घेरा। उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों के हनन और क्षेत्र में लोगों को दिए जा रहे कष्टों पर भी प्रकाश डाला, यह कहते हुए कि अगर पाकिस्तान को वास्तव में मानवाधिकारों की चिंता है, तो उसे पहले अपने अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में स्थिति सुधारनी चाहिए।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) पर भारत का स्पष्ट रुख
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। पेटल गहलोत ने सीधे तौर पर कहा कि पाकिस्तान को कश्मीर की बात करने से पहले अपने अवैध कब्जे वाले PoK को खाली करना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान के दावों की बखिया उधेड़ते हुए कहा कि जिस भूमि पर उसने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, उसे पहले भारत को लौटाए। यह भारत की दृढ़ स्थिति को दर्शाता है कि कश्मीर का विवादित हिस्सा PoK है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, न कि भारत का जम्मू-कश्मीर। यह भारत की अटल नीति है कि PoK पर पाकिस्तान का कब्जा अवैध है और इसे हर हाल में समाप्त होना चाहिए।
शहबाज़ शरीफ के भाषण के बाद पत्रकारों द्वारा आतंकी हाफिज सईद पर सवाल पूछे जाने पर उनके भागने का जिक्र करते हुए गहलोत ने पाकिस्तान के पाखंड को और उजागर किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ पाकिस्तान वैश्विक मंच पर शांति और मानवाधिकारों की बात करता है, वहीं दूसरी ओर वह अपने देश में सक्रिय आतंकवादियों पर कोई कार्रवाई नहीं करता और सवालों से कतराता है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि पाकिस्तान की कथनी और करनी में कितना अंतर है और वह किस तरह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को धोखा देने की कोशिश करता है।
पेटल गहलोत का यह दमदार और तथ्य-आधारित पलटवार भारत की सशक्त राजनयिक छवि को दर्शाता है। इसने न केवल पाकिस्तान के दावों की हवा निकाल दी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने उसकी विश्वसनीयता पर भी सवालिया निशान लगा दिया। भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि वह आतंकवाद के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा और अपनी संप्रभुता तथा अखंडता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच पर भारत का यह दृढ़ रुख दुनिया को यह बताता है कि भारत एक जिम्मेदार राष्ट्र है जो शांति और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन वह किसी भी देश द्वारा फैलाए गए झूठ या आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह घटनाक्रम निश्चित रूप से पाकिस्तान के लिए एक बड़ी राजनयिक हार साबित हुआ है, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और नुकसान पहुंचा है।
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