यूएन में शहबाज शरीफ के भाषण पर भारत का पलटवार, पेटल गहलोत ने उड़ा दीं पाकिस्तान के दावों की धज्जियां - India TV Hindi
संयुक्त राष्ट्र में भारत का करारा पलटवार: पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश, गहलोत ने उड़ाई शरीफ के दावों की धज्जियां
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में एक बार फिर पाकिस्तान ने अपने चिर-परिचित एजेंडे के तहत भारत के खिलाफ अनर्गल आरोप लगाए और कश्मीर सहित कई मुद्दों पर बेबुनियाद दावे पेश किए। लेकिन इस बार भारत ने अपने कड़े और प्रभावी पलटवार से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के हर झूठ का पर्दाफाश कर दिया। भारत की युवा और प्रखर राजनयिक पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के हर दावे को तर्कों और तथ्यों के साथ ध्वस्त करते हुए उसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पूरी तरह बेनकाब कर दिया। यह घटनाक्रम वैश्विक कूटनीति के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था, जिसने पाकिस्तान की दोहरी नीति और आतंकवाद पर उसके पाखंड को उजागर किया।
शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में कश्मीर का राग अलापते हुए उसे "गले की नस" बताया और भारत पर "सिंधु के पानी को रोकने" की धमकी देने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत क्षेत्र में शांति के प्रयासों को कमजोर कर रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से कश्मीर मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया और भारत को "ऑपरेशन सिंदूर" जैसी काल्पनिक धमकियों से भी डराने की कोशिश की। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की चापलूसी करने का भी कोई मौका नहीं छोड़ा, जिसके माध्यम से वे अपनी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय विफलता पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे थे। शरीफ का भाषण पाकिस्तान की उस पुरानी रणनीति का हिस्सा था, जिसमें वह अपनी आंतरिक समस्याओं से ध्यान भटकाने और अंतर्राष्ट्रीय सहायता प्राप्त करने के लिए भारत को खलनायक के रूप में पेश करता है।
पाकिस्तान के इन निराधार आरोपों और भ्रामक दावों का जवाब देने के लिए भारत की ओर से प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने मोर्चा संभाला। एक संक्षिप्त लेकिन बेहद प्रभावी भाषण में गहलोत ने पाकिस्तान के दावों को एक-एक करके खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा और पाकिस्तान को अपने अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। गहलोत ने पाकिस्तान को आतंकवाद का वैश्विक केंद्र करार देते हुए कहा कि जिस देश ने ओसामा बिन लादेन को पनाह दी और जिसने अपने यहाँ संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादियों को आश्रय दे रखा है, उसे मानवाधिकारों और क्षेत्रीय शांति पर उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान को याद दिलाया कि वह एक ऐसा राष्ट्र है जिसने आतंकवाद को अपनी राज्य नीति का एक हथियार बनाया हुआ है।
सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान के आरोपों का जवाब देते हुए पेटल गहलोत ने दोहराया कि भारत हमेशा अंतर्राष्ट्रीय संधियों का सम्मान करता है और उनका पालन करता है। उन्होंने पाकिस्तान को सलाह दी कि वह अपनी काल्पनिक धमकियों के बजाय अपने देश में जल प्रबंधन और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान दे। गहलोत ने पाकिस्तान के उस खोखले दावे को भी चुनौती दी कि वह क्षेत्र में शांति चाहता है, जबकि उसका अपना ट्रैक रिकॉर्ड लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने और अस्थिरता पैदा करने का रहा है। उन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार और बलूचिस्तान व खैबर पख्तूनख्वा में मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन पर भी प्रकाश डाला, जो पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय साख पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
भारत के इस तीखे और तथ्य-आधारित पलटवार ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान के दावों की हवा निकाल दी। यह स्पष्ट था कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के दोहरावपूर्ण और बेबुनियाद आरोपों से थक चुका है। भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर किसी भी तरह की चुनौती को बर्दाश्त नहीं करेगा और आतंकवाद के खिलाफ उसकी लड़ाई जारी रहेगी। पेटल गहलोत का वक्तव्य न केवल पाकिस्तान के प्रचार को ध्वस्त करने में सफल रहा, बल्कि इसने भारत की मजबूत कूटनीतिक स्थिति और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती विश्वसनीयता को भी रेखांकित किया। यह भारत की दृढ़ता और आत्म-विश्वास का प्रतीक था, जिसने एक ऐसे देश को दर्पण दिखाया जो दशकों से केवल नफरत और झूठ की राजनीति पर पनप रहा है। यह घटना दर्शाती है कि भारत अब किसी भी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों का मजबूती से जवाब देने में सक्षम है।
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