यूएन में शहबाज शरीफ के भाषण पर भारत का पलटवार, पेटल गहलोत ने उड़ा दीं पाकिस्तान के दावों की धज्जियां - India TV Hindi
यूएन में भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब: कश्मीर पर झूठ और आतंकवाद पर पर्दाफाश
न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के हालिया सत्र में, भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा कश्मीर मुद्दे पर फैलाए गए झूठ और मानवाधिकारों के उल्लंघन के बेबुनियाद आरोपों का करारा जवाब दिया। भारत ने अपने प्रत्युत्तर के अधिकार का प्रयोग करते हुए, पाकिस्तान को आतंकवाद के केंद्र के रूप में उजागर किया और उसे अपने आंतरिक मामलों में झाँकने की सलाह दी, बजाय इसके कि वह पड़ोसी देशों के आंतरिक मामलों में दखल दे। भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा की धज्जियां उड़ाते हुए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने इस्लामाबाद का असली चेहरा बेनकाब किया।
शहबाज शरीफ का पुराना राग: कश्मीर और मनगढ़ंत आरोप
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र में अपने संबोधन के दौरान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हमेशा की तरह कश्मीर मुद्दे को उठाया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का आरोप लगाया और क्षेत्र के लोगों के लिए 'आत्मनिर्णय के अधिकार' की वकालत की। शरीफ ने भारत पर आरोप लगाया कि वह क्षेत्र में जनसंख्या के स्वरूप को बदलने की कोशिश कर रहा है और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन कर रहा है। पाकिस्तान का यह चिर-परिचित रवैया रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग भारत विरोधी प्रचार के लिए करता है, खासकर जब वह खुद आंतरिक संकटों और वैश्विक आलोचनाओं का सामना कर रहा हो।
पेटल गहलोत का सशक्त प्रत्युत्तर: तथ्यों और कूटनीतिक प्रहार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के भ्रामक दावों का खंडन करने के लिए, भारत की ओर से प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने मोर्चा संभाला। उनके संक्षिप्त लेकिन सशक्त भाषण ने पाकिस्तान के हर झूठ को तथ्यों के आधार पर ध्वस्त कर दिया। गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अविभाज्य अंग थे, हैं और रहेंगे। उन्होंने पाकिस्तान को याद दिलाया कि 1947 में जब हमलावरों ने जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया था, तब भारत इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले गया था, और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 47 (UNSC Resolution 47) में साफ तौर पर कहा गया था कि पाकिस्तान को पहले अपनी सेनाएं वापस बुलानी होंगी, जिसके बाद ही कोई आगे की कार्रवाई संभव होगी। पाकिस्तान ने आज तक इस मूलभूत शर्त का पालन नहीं किया है।
गहलोत ने पाकिस्तान को "आतंकवाद का वैश्विक केंद्र" करार दिया, जो दुनिया भर में शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसने ओसामा बिन लादेन जैसे दुर्दांत आतंकवादी को आश्रय दिया और आज भी कई सूचीबद्ध आतंकवादियों को अपने यहाँ पनाह दे रहा है। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पर सवाल उठाया कि वह एक ऐसे देश का नेतृत्व कैसे कर सकते हैं जो आतंकवादियों को 'शहीद' कहता है और उनके स्मारकों का निर्माण करता है?
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) पर भारत का स्पष्ट रुख
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि उसे कश्मीर की बात करने के बजाय पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की बात करनी चाहिए, जो अवैध रूप से उसके कब्जे में है। उन्होंने पाकिस्तान से इस क्षेत्र को तुरंत खाली करने की मांग की, क्योंकि यह भारत का अभिन्न अंग है। गहलोत ने पाकिस्तान के अपने ही मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल उठाए, खासकर बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध जैसे क्षेत्रों में जहाँ अल्पसंख्यकों और स्थानीय आबादी पर अत्याचार आम बात है। उन्होंने कहा कि जिस देश का अपना मानवाधिकार रिकॉर्ड इतना खराब हो, उसे दूसरों को मानवाधिकारों पर उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।
आतंकवाद पर पाकिस्तान की दोहरी नीति का पर्दाफाश
संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्रकारों ने मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद जैसे आतंकवादियों को पनाह देने के संबंध में तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। शरीफ इन सवालों से बचते नजर आए, जो पाकिस्तान की आतंकवाद के प्रति दोहरी नीति को उजागर करता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लगातार यह आग्रह किया है कि वह पाकिस्तान पर आतंकवाद के वित्तपोषण और समर्थन को रोकने के लिए दबाव बनाए। भारत का यह स्टैंड रहा है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और पाकिस्तान की गिरती विश्वसनीयता
भारत की यह स्पष्ट और मुखर कूटनीति वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती साख को दर्शाती है। जहां एक ओर भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है, वहीं पाकिस्तान अपनी लगातार गलत नीतियों और आतंकवाद के समर्थन के कारण अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा है। शहबाज शरीफ का संयुक्त राष्ट्र में दिया गया भाषण पाकिस्तान की हताशा और अलगाव का प्रतिबिंब था, जबकि पेटल गहलोत का प्रत्युत्तर भारत की दृढ़ता, गरिमा और कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है। यह भारत की नीति का स्पष्ट संदेश था कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा और हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने हितों की रक्षा के लिए तत्पर रहेगा।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कश्मीर मुद्दा पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है और पाकिस्तान द्वारा फैलाया गया कोई भी दुष्प्रचार वैश्विक समुदाय में अब स्वीकार्य नहीं होगा। भारत ने प्रभावी ढंग से पाकिस्तान को आईना दिखाया है और उसे अपने देश के भीतर व्याप्त समस्याओं को सुलझाने तथा आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करने की सलाह दी है।
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