IWT: सिंधु जल संधि पर शहबाज शरीफ की युद्ध की धमकी की भारत ने निकाली हवा, टेंशन में आया पाकिस्तान - Navbharat Times
सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की युद्ध की धमकी: भारत ने निकाली हवा, वैश्विक मंच पर पाक हुआ बेनकाब
नई दिल्ली: हाल ही में संपन्न हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक जंग एक बार फिर देखने को मिली, जहाँ भारत ने पाकिस्तान के हर बेबुनियाद दावे और धमकी का करारा जवाब दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ द्वारा सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर युद्ध की धमकी देने के बाद भारत ने तत्काल और प्रभावी ढंग से इसकी हवा निकाल दी, जिससे पाकिस्तान पर चौतरफा दबाव बढ़ गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को लगातार मज़बूत कर रहा है और आतंकवाद पर अपनी ज़ीरो-टॉलरेंस नीति पर अडिग है।
सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की बेतुकी धमकी और भारत का संयमित जवाब
शहबाज़ शरीफ ने अपने संयुक्त राष्ट्र संबोधन के दौरान सिंधु जल संधि को लेकर भारत को परोक्ष रूप से "युद्ध" की धमकी दी थी, जो कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई एक ऐतिहासिक जल-साझाकरण संधि है। शरीफ के इस बयान को भारत ने तत्काल खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि भारत इस संधि का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी प्रकार की धमकी के आगे झुकेगा नहीं। भारत ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि वह एक ज़िम्मेदार राष्ट्र है और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का सम्मान करता है, लेकिन अपने हितों की रक्षा में भी सक्षम है। भारतीय कूटनीतिक हलकों ने पाकिस्तान को यह भी स्पष्ट संदेश दिया कि एक ऊपरी तटवर्ती राज्य के रूप में भारत के अपने वैध अधिकार हैं, जिनका वह आवश्यकता पड़ने पर उपयोग कर सकता है। इस कूटनीतिक पलटवार से पाकिस्तान में 'टेंशन' बढ़ गई है, क्योंकि उसे अब यह आभास हो रहा है कि उसकी धमकियों का भारत पर कोई असर नहीं होने वाला।
आतंकवाद पर भारत की ज़ीरो-टॉलरेंस नीति और जयशंकर का कड़ा संदेश
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर जमकर लताड़ा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत आतंकवाद पर ज़ीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाता रहेगा और सीमा पार आतंकवाद को मुँहतोड़ जवाब देता रहेगा। जयशंकर ने पाकिस्तान को सीधा संदेश देते हुए उसे आतंकवाद का केंद्र बताया, जिसने दशकों से अपनी धरती का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इस पर पाकिस्तान का कोई दावा नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया जब पाकिस्तान के राजनयिकों ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाने का असफल प्रयास किया। जयशंकर के इस कड़े रुख से पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर और भी अधिक अलग-थलग पड़ना पड़ा है।
यूएन में पाकिस्तान के दावों की उड़ाई गई धज्जियां
शहबाज़ शरीफ के भाषण के बाद भारत की तरफ से दिए गए राइट टू रिप्लाई (Right to Reply) में युवा भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के सभी दावों की धज्जियां उड़ा दीं। गहलोत ने पाकिस्तान को आतंकवाद का प्रायोजक बताते हुए उसके बेबुनियाद आरोपों का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान आतंकवाद को सरकारी नीति के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है और यह एक ऐसा देश है जहाँ ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकी को पनाह मिलती है। गहलोत के जवाब ने पाकिस्तान के झूठ को वैश्विक समुदाय के सामने पूरी तरह उजागर कर दिया, जिससे उसकी विश्वसनीयता पर और सवाल खड़े हो गए। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में "कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं" कहकर एक बार फिर ज़हर उगला, लेकिन भारत ने अपने दृढ़ संकल्प और जयशंकर के हालिया बयानों के माध्यम से इसका प्रभावी ढंग से मुकाबला किया।
भारत की मज़बूत कूटनीति और पाकिस्तान का बढ़ता अलगाव
वर्तमान परिदृश्य यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक स्थिति को मज़बूत कर रहा है, जबकि पाकिस्तान अपनी पुरानी घिसी-पिटी रणनीति और आतंकवाद के समर्थन के कारण लगातार अलग-थलग पड़ रहा है। भारत ने सिंधु जल संधि जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संयम और दृढ़ता का परिचय दिया है, वहीं आतंकवाद जैसे महत्वपूर्ण विषय पर वैश्विक समुदाय को एकजुट करने में भी सफलता प्राप्त की है। जयशंकर के बयानों और भारतीय राजनयिकों के त्वरित पलटवार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब पाकिस्तान की किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है, चाहे वह सीमा पर हो या कूटनीतिक मंच पर। पाकिस्तान को यह समझना होगा कि उसकी "युद्ध की धमकी" और बेबुनियाद दावे उसे और अधिक अंतर्राष्ट्रीय अलगाव की ओर धकेलेंगे, जबकि भारत एक ज़िम्मेदार और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में अपनी स्थिति को सुदृढ़ करता रहेगा।
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