LIVE: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली समेत कई राज्यों में प्रदर्शन, राजघाट से निकले कांग्रेस नेता - India TV Hindi
लोकतंत्र की दुहाई: ज्ञानेश कुमार के विरोध में देशव्यापी विपक्ष का हुंकार, राजघाट से उठा प्रतिरोध का स्वर
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव आयोग के महत्वपूर्ण पद पर हुई एक नियुक्ति को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस, लगातार तीसरे दिन ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के विरोध में सड़कों पर उतरे हैं। इस देशव्यापी प्रदर्शन की शुरुआत आज महात्मा गांधी की समाधि स्थल राजघाट से हुई, जहाँ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने लोकतंत्र पर मंडराते कथित संकट को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है, जब देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और स्वायत्तता पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
राजघाट से संकल्प की हुंकार: कांग्रेस का जन-जागरण अभियान
आज सुबह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सांसद राजघाट पहुंचे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद, इन नेताओं ने ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के खिलाफ अपने विरोध प्रदर्शन का बिगुल फूंका। राजघाट का चयन प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण था, जो शांतिपूर्ण प्रतिरोध और नैतिक शक्ति का प्रतीक है। कांग्रेस नेताओं ने यहाँ से देश के विभिन्न कोनों में फैले अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। उनका मानना है कि यह नियुक्ति संवैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करती है और चुनाव आयोग की स्वायत्तता को कमजोर करती है। विपक्षी सांसदों के काफिले ने राजघाट पर पहुंचकर धरना दिया, जो यह दर्शाता है कि वे इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं।
"4 लोगों ने देश को हाइजैक किया": राहुल गांधी का सीधा प्रहार
प्रदर्शन के दौरान, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया, "देश को चार लोगों ने हाइजैक कर लिया है।" हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस बयान को सत्ता प्रतिष्ठान पर लोकतंत्र के सिद्धांतों की अनदेखी करने और चंद लोगों के हाथों में शक्ति केंद्रित करने के गंभीर आरोप के रूप में देखा जा रहा है। राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं खतरे में हैं और जनता की आवाज को दबाया जा रहा है। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, जहाँ सरकार पर संविधान की भावना के खिलाफ काम करने का आरोप लग रहा है, और यह देश के लोकतांत्रिक भविष्य को लेकर गहरी चिंता पैदा कर रहा है।
देशभर में विरोध की लहर: चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल
दिल्ली ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे कई अन्य राज्यों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शनों में मुख्य रूप से सरकार पर चुनाव आयोग जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया। विपक्षी दलों का कहना है कि जिस प्रक्रिया के तहत यह नियुक्ति हुई है, वह पारदर्शिता और निष्पक्षता के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है। वे मांग कर रहे हैं कि चुनाव आयोग की नियुक्तियों में अधिक पारदर्शिता लाई जाए और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि देश की लोकतांत्रिक प्रणाली में जनता का विश्वास बना रहे। यह लगातार तीसरा दिन था जब विपक्ष ने इस मुद्दे पर अपना मुखर विरोध जारी रखा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे इस लड़ाई को लंबी खींचने के लिए तैयार हैं।
ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति को लेकर जारी यह विरोध प्रदर्शन केवल एक पद के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का संकेत है। विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने और सरकार पर दबाव बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित दिख रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस विरोध पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या यह आंदोलन देश की राजनीतिक दिशा में कोई महत्वपूर्ण बदलाव ला पाता है। फिलहाल, लोकतंत्र की रक्षा के आह्वान के साथ देशभर में प्रतिरोध का यह स्वर गूंज रहा है, जो देश के राजनीतिक परिदृश्य में एक नई हलचल पैदा कर रहा है।
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